दोस्त की सच्ची कहानी, small story in hindi

small story in hindi

      मेरे दोस्त की सच्ची कहानी 

small story in hindi, ये कहानी है मेरे दोस्त की आजकल ये विस्वास करना भी बहुत मुश्किल है की जुडवा लोग होते है या नहीं अगर होते भी है तो वो हमसे इतनी दूर होते है की हम उनसे मिल भी नहीं पाते और शायद यही समझते है की जुड़वाँ होते ही नहीं है, ये भी एक किस्सा है मेरे दोस्त का, जब उसने बताया की उसके साथ क्या हुआ तो मुझे भी लगा की में भी ये बात आप के साथ शेयर करू, और आप भी जान पाए की उस दिन मेरे दोस्त के साथ क्या हुआ था.




मेरे दोस्त की बात जब आरम्भ होती है जब उसके कहर पर एक शादी का कार्ड आया और बोला की देखो शादी का कार्ड आया है और बरात भी कितनी दूर जानी है , उसके पापा ने किसी कारण के शादी में जाने से मन कर दिया और मेरे दोस्त को कुछ और दोस्त के साथ ही शादी में जाना पड़ गया,  




शादी की बरात को दिन में ही जाना था तो बस निकलने  का समय सुबह दस बजे था क्योकि शादी दोपहर में थी, बस का सफर लगभग तीन घंटे का था तो बस का निकलने का समय दस बजे रखा था जिससे बरात टाइम पर पहुच जाए, दिन की शादी और गर्मियों का दिन बहुत ही मुसीबत का काम था, खैर बस में सभी लोग चढ़ गए

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और बस सवा दस बजे चल दी, बस में, मनोरंजन का बस एक ही साधन था गाने का पूरी बस में  बस गाने ही बज रहे थे और गाने को सुनते सुनते हमारी बस उस गाव में पहुच गयी जहाँ पर शादी होनी थी,

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 सभी बाराती को कुछ दुरी पर था दिया था क्योकि अभी काफी समय था, सभी इंतजर कर रहे थे क्योकि सभी लोगो को वापिस जाना था लगभग दो बजे का समय था और फिर खाने का प्रोग्राम चल पड़ा और सभी लोग खाने के लिए चल दिए, 

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खाने का पूरा इंतज़ाम एक बड़े से घेर में कराया गया और वो जगह पूरी तरह से भरी थी उसमे कुछ बराती और कुछ वही के लोग भी थे जो खाना खा रहे थे, गाव की शादी और ऊपर से इतनी भीड़ की खाने में बड़ी समस्या हो रही थी, क्योकि खाने का प्रोग्राम ही इतनी देर में शरू किया था तो भीड़ तो होनी थी, गाव के लोग ऐसे खा रहे थे की खा कम रहे थे और उदार इधर ज्यादा घूम रहे थे, 

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खाना खा कर लोग धीरे धीरे बहार आने लगे और मेरा दोस्त भी खा कर बाहर आ गया और बाहर आने पर देखा की ये गाव तो बहुत ही अच्छा है एक डीएम ताज़ी हवा चल रही थी और हमारे शहर की हवा तो बस आप लोग जानते ही कैसी है चारो और प्रदूषण ही प्रदूषण  है. मेरे दोस्त ने सोचा की क्यों न यह पर आये है तो थोड़ा घूम ही लिया जाए अभी बस निकले में काफी समय भी है और ज्यादा दूर भी नहीं जाएंगे तो मेरे दोस्त के दोस्त थोड़ा घूमने के लिए वह से चल दिए तो कुछ दूरी पर लोग अपने खेत में काम कर रहे थे, हमने सोचा की की क्यों न इनसे बात की जाए और उनके बारे में जाना जाए की वो लोग कब से यह है और क्या क्या करते है है,

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तभी हमने उनसे बात की और वो भी हमसे बात करने लगे तो, उनमे से कुछ दूरी पर एक बूढ़े बाबा बैठे थे हमने देखा की वो चिलम से हुक्का पि रहे थे और थोड़ा थोड़ा ख़ास भी रहे थे हमने पूछ की ये बाबा तो बहुत ही बूढ़े लग रहे है ये कौन है, उनमे से एक आदमी ने बताया की ये हमारे दादा जी है और ये खेत में बहुत मेहनत करते थे अब उनसे काम नहीं हो पाता है सो हमारे साथ ही खेत आ जाते है और बेथ जाते है, हमारा भी मन लगा रहता है और हम भी बोर नहीं होते है.  

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और तुम बताओ तुम कौन हो हमने तुम्हे पहले नहीं देखा है मेरे दोस्तों ने बताया की हम लोग शादी में यह आये है उन्होंने कहा की अच्छा तो हीरा की बेटी की शादी में आये हो, हमने कहा की हां, वही

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तभी मेरे दोस्त ने सोचा की बूढ़े बाबा को भी नमस्कार किया जाए तो वो आगे जहाँ पर बूढ़े बाबा बैठे थे चला गया और बोला की बाबा जी नमस्कार, बूढ़े बाबा ने देखा तो देखता ही रह गया और बूढ़े के मुह से बस यही शब्द निकले भूत, भागो भूत आया, भागो भूत आया, मेरे दोस्त ने कहा की कहा है भूत उसने फिर कहा की भोगो भूत आया, और वो सभी लोग खेत छोड़कर भाग गए और हम सब भी वही छिप गए. पर हमे कोई भूत नज़र नहीं आ रहा था हम सभी दोस्त यही सोच रहे थे की ये बाबा तो बस मजाक कर रहा है और न जाने उसके पोते भी कहा भाग गए,  

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अब हमारा मूड भी खराब हो गया था ये गाव के लोग न जाने कस मज़ाक करते है भागो भूत आया, अरे भाई ये कोई बात है, मज़ाक करने के लिए हम ही मिले थे और कोई नहीं, हमने सोचा की चलो यारो अब चलते है यहाँ से, हम सभी वापिस आने लगे तो बाबा का पोता हमे रस्ते मिल गया और उसने कहा की तुम भूत हो, हमने कहा की ये क्या भूत भूत लगा रखा तुम सबने और तुम मुझे भूत कह रहे हो, मेरे दोस्त ने कहा की कही तुम सब पागल तो नहीं हो,

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फिर बाबा के पोते ने कहा की बाबा तुम्हे देख कर दर गए थे और उसने कहा की चलो उस पेड़ के पास बैठे है वही बताऊंगा की क्या बात है, हमने कहा की चलो,

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फिर हम सब वही बैठ गए और उसने एक किस्सा सुनाया और हम सब डर के मारे कॉप रहे थे और बस हमने तो यही मन बना लिया की यहाँ से भागो, और हम सबने कहा की अब हम चलते है हरी बस जाने का टाइम हु चूका है और उसने कहा ठीक है जब इस गाव आओ तो हमारे पास जरूर आना सभी ने कहा ठीक है चलते है यहाँ से, बस थोड़ी दूरी पर खड़ी थी और हम सभी बस में बैठ गए और बस कुछ देर में चल दी और सभी लोग घर वापिस आ गए और मेरे दोस्त ने मुझे बुलाया और सारा किस्सा सुनाया और वो बात भी बताई की उसके पोते ने उससे क्या कहा था. 

 

small story in hindi, उसने बताया की दादा जी के समय पर दादा जी का एक दोस्त एक लड़की से प्यार करता था और जब ये बात गाव वालो को पता चली तो इस बात का विरोध किया और दादा जी के दोस्त और उस लड़की ने साथ में जान दे दी और आज भी वो लड़की की आत्मा वही जंगल में घूमती है और मेरे दोस्त को देख कर दादा जी ने मेरे दोस्त को भूत समझ लिया और वह से भाग गए और हम सब भी वह पर और रुकना नहीं चाहते थे, ये किस्सा मुझे अच्छा लगा तो मेने सोचा की आप सभी भी इस बारे में जाने की हमशक्ल होना भी कई बार मुसीबत बन जाता है, जैसा की आपने इस किस्से में पढ़ा,,,,

 

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