सेवा का सही मूल्य हिंदी कहानी, story hindi

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सेवा का सही मूल्य हिंदी कहानी (story hindi) आपको अच्छी लगेगी क्योकि कभी-कभी जीवन में हम ऐसा फैसला लेते है जिससे हमे आगे चलकर परेशानी होती है आपको बहुत सोचकर ही कोई फैसला लेना चाहिए.

सेवा का सही मूल्य हिंदी कहानी : story hindi

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उस गांव की बहुत बड़ी समस्या थी वह अपनी समस्या को लेकर बहुत परेशान रहते थे जब भी सभी लोग आपस में मिलते थे एक ही बात करते थे कि हमारे यहां पर कोई भी डॉक्टर नहीं है और अगर हमें किसी का इलाज करवाना है तो हमें बहुत दूर तक जाना होता है जिससे हमें बहुत परेशानी होती है इस बात को चलते देख गांव के प्रधान ने अपने बेटे को बहुत अच्छी तरह से पढ़ाया और उसे आखिरकार डॉक्टर बना ही दिया जब डॉक्टर बनकर एक दिन अपने घर पर आए तो सभी लोग उसके डॉक्टर बनने की खुशी में बहुत ही अच्छी तरह से आए हुए थे

 

क्योंकि वह यह समझ चुके थे कि अब हमारी समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी गांव का प्रधान भी यही बात जानता था कि यह आज उसका बेटा डॉक्टर बन गया है और अब सब की सेवा बहुत अच्छी तरह से होती रहेगी किसी को भी कोई परेशानी इस गांव में नहीं होने वाली है गांव के प्रधान ने अपने बेटे को बुलाया और कहा कि अब तुम्हें यहीं पर रहकर गांव वालों की सेवा करनी होगी और उनका इलाज करना होगा सभी गांव वाले इलाज की परेशानियों से बहुत ही दुखी हो गए हैं क्योंकि वह इलाज करवाने के लिए बहुत दूर तक नहीं जा सकते हैं

 

गांव के प्रधान ने यह ऐलान कराया है कि अब कुछ देर बाद यहां पर एक सभा का आयोजन होगा और जिसको भी जो भी समस्या है उसका समाधान करने के लिए आप सभी अपनी अपनी बात यहां पर रखेंगे तभी प्रधान के बेटे ने कहा कि मुझे यहां पर रहकर अपना समय बर्बाद नहीं करना है अगर मैं यहीं पर रहा तो मैं जीवन में आगे नहीं बढ़ पाऊंगा मुझे आगे बढ़ने के लिए शहर में जाकर ही अपना काम करना होगा जिससे मैं एक काबिल डॉक्टर बन पाऊं जब यह बात प्रधान ने सुनी तो उसे बहुत बुरा लगा क्योंकि वह गांव वालों के लिए कुछ करना चाहता था

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लेकिन उसके बेटे ने ऐसी बात कह दी जिससे कि उसको बहुत ही शर्मिंदगी महसूस हो रही थी क्योंकि उसने सभी गांव वालों से यह वादा किया था कि वह आने वाले समय में सभी की समस्याओं को धीरे-धीरे समाप्त कर देंगे प्रधान अपने बेटे को घर के अंदर ले गए और उसे समझाने लगे कि तुम यह सब क्या कह रहे हो तुम्हें मैंने पढ़ाई करने के लिए इसलिए भेजा था कि जिससे तुम वापस आकर यहां पर सब की सेवा करो और उनकी परेशानियों को दूर करो लेकिन प्रधान के बेटे ने कहा कि मैं यहां पर रहकर अपना समय बर्बाद नहीं करूंगा

 

क्योंकि इससे मुझे कोई भी फायदा नहीं होने वाला है अगर मैं गांव में ही रहा तो मैं जीवन में कैसे आगे बढ़ पाऊंगा यह बात आपको सोचनी चाहिए बेटा अपने पिताजी की बात बिल्कुल भी नहीं सुन रहा था प्रधान जी उसे समझाते हुए बहुत थक चुके थे लेकिन वह बात को मानने को तैयार नहीं था और उसी दिन प्रधान जी का बेटा घर छोड़कर चला गया और उसके बाद वह कुछ समय तक भी वापस नहीं आ पाया था समय बीतता चला गया और प्रधान जी की यह बात वही पर रह गई

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तभी प्रधान जी के घर पर एक रिश्ता आया क्योंकि उसकी एक लड़की थी उसके लिए रिश्ता एक डॉक्टर के यहां से आया था प्रधान ने कहा कि अगर मैं यह रिश्ता करता हूं तो आपको एक बात यह यहां पर रखनी होगी कि यहां पर मैं आपके लिए एक अस्पताल बनवा देता हूं जिसमें तुम यहां पर रहकर सभी गरीबों की सेवा कर पाओ और उनकी समस्याओं का निदान कर पाऊं अगर आप लोगों को यह बात मंजूर है तो मैं यह रिश्ता करने के लिए तैयार हूं प्रधान को गांव वालों की बहुत चिंता थी इसलिए वह यह सोच रहे थे कि अगर यह रिश्ता हो जाता है तो इससे गांव वालों के लिए मैं कुछ हद तक अच्छा कर पाऊंगा

 

प्रधान की लड़की का रिश्ता तय हो चुका था और वह इस बात को मान गए थे जब शादी हो गई तो प्रधान जी का लड़का भी शादी में आया था लेकिन प्रधान जी ने उससे कोई भी बात नहीं की क्योंकि वह घर छोड़कर चला गया था और जब उसे पता लगा कि उसकी बहन की शादी है तो वह जरूर आया उसके बाद आकर उसने कुछ नहीं कहा और जब शादी हो गई तो प्रधान जी ने एक अस्पताल बनवाया और उसी में अपने दामाद को वहां पर काम करने के लिए बैठाया और इस तरह गांव वालों की भी मदद होने लगी

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लेकिन प्रधान जी का लड़का अगले दिन ही वापस चला गया था उसके बाद वह कभी उस घर में वापिस नहीं आया प्रधान जी को इस बात का दुख था लेकिन वह गांव के लिए कुछ कर पाए इसलिए वह इस बात को धीरे-धीरे भूल गए एक दिन प्रधान जी का लड़का अपने घर पर वापस आए और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगने लगा पिताजी यह बात जानते थे कि वह एक लालच के चलते हुए वहां पर गया था

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लेकिन अब उसका लड़का उनसे अगर शमा मांग रहा है तो पिता जी ने उसे माफ कर दिया और अपने साथ ही रहने को कहा और इस प्रकार वह लड़का भी साथ में रहने को मान गया इस तरह दोस्तों समस्याएं तो आती रहती हैं लेकिन अगर हमें कोई समझ बहुत ज्यादा समय बीतने के बाद आए तो उसका कोई फायदा नहीं होता है अगर हम समय इसके चलते हुए सब कुछ समझ सकते हैं तो सही समझ का इस्तेमाल हमें जरूर करना चाहिएजीवन का मतलब ही सबकी सेवा करना है अगर हम किसी की सेवा नहीं करते है तो जीवन भी बेकार ही हो जाता है इसलिए सबकी सेवा करनी चाहिए,

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