एक राजा की हिंदी कहानी, king stories in hindi

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एक राजा की हिंदी कहानी (king stories in hindi) आपको पसंद आएगी क्योकि हम कितनी भी मुश्किल में क्यों न हो हमे परेशानी से निकलना आना चाहिए.

king stories in hindi : एक राजा की हिंदी कहानी 

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राजा बहुत ही थके हुए नज़र आ रहे थे, क्योकि वह बहुत दिन बाद अपने महल में वापिस आये हुए थे, रानी ने राजा से पूछा की आप बहुत ही चिंता में लगे हुए है राजा ने अपनी रानी से बताया की हमारी चिंता यही है की हमारी पुत्री की शादी अभी नहीं होगी, रानी को भी बहुत अजीब लग रहा था जबकि रानी अपनी पुत्री के लिए योग्य राजा ढूढ़ रही थी,

 

रानी ने राजा से पूछा की ऐसी क्या बात है की आप बहुत परेशान नज़र आ रहे है राजा ने बताया की में अपने गुरु से मिलकर आ रहा हु, गुरु ने बताया की हमारे राज्य पर भरी संकट नज़र आ रहा है हमे अपने राज्य की सुरक्षा भी खतरे में दिखाई दे रही है, ऐसा लगता है की हमारे राज्य पर कभी भी आक्रमण हो सकता है ऐसी बात की चिंता हमे हो रही है, इसलिए में बहुत ही परेशान हु, ऐसी समस्या में अपनी पुत्री का विवाह करना बहुत ही मुश्किल हो रहा है अगर हम अपनी पुत्री का विवाह कर देते है तो भी राज्य की परेशानिया कम नहीं होगी,

 

राजा का बहुत प्रिये सेनापति देवसिंघ है राजा उस पर बहुत भरोसा करते है, वह हमारे राज्य के लिए बहुत कुछ कर सकता है देवसिंघ उनके साथ है तो चिंता कम नहीं है बल्कि बहुत ज्यादा होती है क्योकि अगर देवसिंघ को कुछ हो जाता है तो हमे बहुत परेशानी होती है देवसिंघ को ही राजा अपनी पुत्री से विवाह के लिए त्यार था मगर जब अपने राज्य का भीवश ठीक न हो तो कुछ भी करना संभव नहीं था रानी ने कहा की यह भी हो सकता है की गुरु जी से कुछ गलती हो गयी हो, राजा ने कहा की दिलासा देना तो ठीक है मगर सच्चाई को कोई भी नहीं दूर कर सकता है 

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रानी और राजा इस तरह की बाते करके बहुत परेशान थे तभी राजगुरु आते है और रानी और राजा से पूछते है की क्या बात है आप लोग ऐसे क्यों बैठे है राजा यह बात राजगुरु से कहता है राजगुरु कुछ सोचने पर कहते है की अगर ऐसा हुआ तो बहुत कुछ समाप्त हो जाएगा तभी एक सैनिक राजा के पास आता है और कहता है की हमारे गुप्तचर एक खबर लेकर आये है राजा ने गुप्तचर को अंदर आने को कहते है, तभी गुप्तचर अंदर आता है और कहता है की हमारे पडोशी राजा हम पर हमला कर सकते है,

 

राजगुरु ने कहा की अगर वह हम पर हमला करते है तो हमारा राज्य ज्यादा देर तक नहीं टिक पायेगा, क्योकि हमारे पास पचास हज़ार सैनिक है बल्कि उनके पास हमसे बहुत अधिक सैनिक है और बहुत से घोड़े और हाथी की सेना भी है जिसका मुकाबला हमारे हाथ में नहीं है हमे यहां से निकलने में ही कुछ सोचना होगा इससे पहले राजा हम पर आक्रमण न कर दे, यह सुनकर रानी बहुत ही ज्यादा घबरा जाती है और तभी देवसिंघ वहा पर आता है और कहता है की हम पर हमला हो सकता है हमे यह खबर अभी मिली है 

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राजा ने कहा की हमे युद करने की कोई भी आवश्यकता नहीं है क्योकि हम जीत नहीं सकते है देवसिंघ ने कहा की महाराज हम युद कर सकते है अगर हम यहां से ऐसे ही चले गए तो हमारी प्रजा का विश्वास हम पर नहीं रहेगा, राजा ने कहा की हम खुद भी इस चिंता में परेशान है, हम क्या कर सकते है उनके पास बहुत अधिक सेना है और हमारी सेना मुकाबला नहीं कर सकती है देवसिंघ ने कहा की अगर हम यहां से जाते है तो इसका प्रभाव क्या होगा आप जानते ही है,

 

इसलिए देवसिंघ ने कहा की आप यहां से दूर कही पर छिप जाए, हम अपनी सेना से उन पर हमला कर देंगे और हो सकता है की जीत हमारी ही होगी, देवसिंघ कमजोर नहीं था राजा इस बात को जानते थे देवसिंघ ने कहा की हो सकता है की हम उनसे सीधे न जीत पाए मगर अगर हम सही तरह से कुछ चीजों का प्रयोग करे तो यह हो सकता है, राजा देवसिंघ के दिमाग की भी तारीफ करते है क्योकि वह कोई भी युद्ध जीत सकते है  

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देवसिंघ की बाते सुनकर राजा अब पीछे नहीं हटना चाहते थे क्योकि जब देवसिंघ साथ में है तो जीत हमारी हो सकती है देवसिंघ यह जानते थे की वह राजा कभी भी हम पर हमला कर सकता था इसलिए उसने अपनी सेना को अलग-अलग भाग में बाटा था, और उनके रस्ते में आने पर बहुत सी जगह उन पर हमला करने वाले साधन का प्रयोग किया था यह काम उन्होंने ने रात में ही कर दिया था क्योकि हो सकता है की कल हम पर हमला हो जाए,

 

जब सुबह हुई तो राजा की सेना उनके महल के सामने खड़ी थी राजा ने कहा की अगर तुम सभी हमसे बचना चाहते है तो बिना लड़े ही हार मान लेनी चाहिए अगर ऐसा नहीं हुआ तो आप सभी जानते है की क्या हो सकता है, देवसिंघ अपनी सेना के साथ में खड़ा था राजा ने देवसिंघ से कहा की इन्हे बता दे की ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है राजा ने जब यह बात सुनी तो अपनी सेना की एक टुकड़ी आगे भेजी और सेना आगे बढ़ते ही पूरी सेना पर हमला हो गया था यह तरकीब देवसिंघ की थी जिससे कोई भी आगे नहीं आ पाया था  

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राजा इस क्रिया को देखकर बहुत परेशान हो गया था वह जितने भी सैनिक भेज रहा था कोई भी राजा के महल तक नहीं जा रहा था एक छोटी सी तरकीब ने देवसिंघ ने ऐसा किया था की उनकी सेना वही पर थी और किसी को भी कुछ भी करने की जरूरत नहीं थी राजा देवसिंघ के बारे में जानते नहीं थे इसलिए राजा बहुत परेशान हो गया था

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राजा महल तक भी नहीं पहुंच रहा था देवसिंघ ने कहा की हमे अपनी सेना भजनी चाहिए तभी सेना ने उनकी सेना को हरा दिया था और देवसिंघ की तरकीब से सब कुछ हो गया था राजा हारकर वहा से चला गया था और देवसिंघ की वजह से ही राजा अपने महल को बचा पाया था उसके बाद राजा ने अपनी पुत्री का विवाह देवसिंघ से कर दिया था और उसके बाद वह राजा भी बन गया था

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अगर हम अपने दिमाग का प्रयोग करे तो बड़ी से बड़ी मुश्किल से भी बच सकते है इसलिए कभी भी जीवन में हार नहीं माननी चाहिए और हमेशा आगे बढ़ते रहे अगर आपको यह एक राजा की हिंदी कहानी, (king stories in hindi) पसंद आयी है तो आगे भी शेयर करे और कमेंट भी करे.

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