राजमहल की कहानी भाग-2, magazine story hindi

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आप यहां पर राजमहल की कहानी भाग-2 पढ़ रहे है, अगर आपने अभी तक इसका पहला भाग नहीं पढ़ा है तो आप उसे जरूर पढ़ ले, पहला भाग पढ़ने के लिए आप यहां पर क्लिक करे, (Read More-राजमहल की कहानी भाग-1) यह कहानी आपको जरूर पसंद आएगी,

magazine story hindi : राजमहल की कहानी भाग-2

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हम यहां पर आपको पहले भाग के बारे में बता देते है जिससे आपको थोड़ा कहानी के बारे में पता चल जाएगा, यह कहानी है एक मुसाफिर की जो सफर पर निकलता है और बहुत मुश्किल से वह सफर को तय करता है रस्ते में उसे एक राजमहल बना हुआ मिलता है वह महल को देखने के लिए अंदर जाता है और उसे वहा पर बहुत से शीशे दिखाई देते है और उन सभी शीशों में एक ऐसा शीशा होता है जिसके अंदर कोई कैद है

 

मुसाफिर यह देखकर डर जाता है और उस महल से निकलने के लिए बहार की तरफ जाता है लेकिन मौसम का रंग एकदम बदल जाता है काले बादल पता नहीं कहा से आ जाते है, और तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो जाती है मुसाफिर अंदर नहीं जाता है मगर उसे बारिश और हवा से भी बचना था इसलिए वह महल के बहार ही खड़ा रहता है और अब आगे पढ़ते है,     

 

मुसाफिर यही सोच रहा था की यह कौन है जो शीशे में बंद है लेकिन मुसाफिर को यह भी डर था की कही वो भी अंदर न बंद हो जाए, शीशे अंदर से आवाज दे रहे थे की तुम भी अंदर आ जाओ और बारिश के पानी से बचो, उन आवाजों के साथ एक आवाज उस आदमी की भी थी जो उन शीशों में कैद था और वह भी बहार निकलने को त्यार था मगर उसकी मदद कोई भी नाभि कर रहा था,

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मुसाफिर को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था बरसिह को देखने पर ऐसा लग रहा था की वह रुकने वाली नहीं थी, मुसाफिर वहा से भाग जाना चाहता था मगर कैसे भागे कुछ पता तो चले तभी मुसाफिर के सामने बहुत तेज बारिश का तूफ़ान आता नज़र आया और वह उससे डरके अंदर की और भागा, तभी वह उस शीशे के पास पहुंच गया था जिसके अंदर कोई कैद था मुसाफिर अंदर नहीं आना चाहता था मगर वह मज़बूरी उसे अंदर ले आयी थी,

 

उस शीशे में बंद आदमी बोलै की तुम मुझे यहां से निकाल सकते है लेकिन मुझे निकालने के लिए तुम्हे रात बारह बजे से कुछ समय पहले ही नकाल सकते हो जब समय रात का हो और बारह न बजे हो तो ही में बहार आ सकता हु, मुसाफिर को अब बहुत ज्यादा डर लग रहा था अभी शाम का वक़्त ही हुआ था और वह जाना चाहता था शीशे में बंद आदमी बोला की में यहां से एक दिन गुजरा रहा था तब मेरी नज़र इस महल पर गयी थी,

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इस महल से कुछ आवाज आ रही थी तभी में अंदर आ गया था मुझे कोई भी नज़र नहीं आ रहा था लेकिन आवाज आती जा रही थी उस आवाज के पीछे में जा रहा था तभी मुझे एहसास हुआ की यह सभी आवाज तो इन शीशो में से आ रही थी में बहुत ज्यादा डर गया था जैसे ही बहार निकलने के लिए जा ही रहा था तभी एक शीशे से रौशनी निकली और में अंदर ही कैद हो गया था, लेकिन मुसाफिर बोला की में तो इन शीशों में कैद नहीं हुआ हु,   

 

शीशे में बंद आदमी बोला की तुम इसलिए बंद नहीं हुए हो क्योकि अभी समय नहीं आया है यह शीशों का जादू तभी ही चलता है जब रात बारह बजे के बाद कोई यहां पर रुकता है इसलिए तुम यहां पर सुरक्षित हो तुम मुझे यहां से निकाल सकते हो और फिर हम इन शीशों को भी समाप्त कर देंगे इनका एक ही तरीका है जब हम इन्हे तोड़कर समाप्त कर देंगे, इसकलए लिए हम इन्हे अभी नहीं तोड़ सकते है अगर ऐसा हुआ तो यह फिर से जुड़ जाएंगे,

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इसलिए तुमने देखा होगा की यहां पर एक भी शीशा टुटा हुआ नहीं है अगर कोई भी इन्हे दिन में तोड़ता है तो यह फिर से जुड़ जाते है, इसलिए यह काम भी हमे रात बारह बजे से पहले करना होगा, ऐसा करने से यह दुबारा नहीं जुड़ पाएंगे और कोई भी यहां पर नहीं कैद होगा हम आने वाले किसी भी व्यक्ति को दुबारा इनमे कैद नहीं होने देंगे मुसाफिर को यह सुनकर अच्छा लग रहा था की इनका जादू अभी नहीं चलेगा,

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अब दोनों वही पर बैठे हुए इंतज़ार कर रहे थे की कब रात के बारह बजे से पहले हम यहां से चले जाए और यह समस्या भी खत्म हो जाए मुसाफिर रात के अँधेरे से डर भी रहा था क्योकि उसके पास उस शीशे के अलावा और कोई भी नहीं था रात धीरे-धीरे आगे की और बढ़ रही थी मुसाफिर का डर भी बढ़ रहा था सभी शीशे चमकने लगे थे महल में ऐसा लग रहा था की रौशनी चारो और बढ़ चुकी है, यह देखकर मुसाफिर ने शीशे में कैद आदमी से पूछा की यह क्या हो रहा है 

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शीशे में कैद आदमी बोला की यह रौशनी करके अपनी और किसी को बुलाने के लिए मजबूर करते है क्योकि जब महल में रौशनी होती है तो कोई भी अंदर आ जाता है और वह कैद हो जाता है इसका शिकार में भी हुआ हु, में भी इस तरह अंदर आ गया था अभी समय होने ही वाला था उस आदमी ने मुसाफिर से कहा की शीशे को तोड़ दो, शीशा टुटा और वह आदमी बहार आ गया था उसके बाद सभी ने मिलकर शीशा तोडा और कोई भी शीशा उन्होंने ने नहीं छोड़ा था

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जब सभी शीशे टूट गए तो रौशनी भी बंद हो गयी थी दोनों महल से बहार आ गए थे और अब उस आदमी ने मुसाफिर से पूछा की तुम अब कहा जाओगे मुसाफिर ने कहा की अब में अपने घर पर जायूँगा और तुम कितने साल से यहां पर बंद थे वह आदमी बोला की मुझे तो यहां पर करीब दस साल बीत गए थे, इस तरफ दोनों अपने-अपने घर चले गए थे मुसाफिर का साफ यही पर खत्म हो गया था मगर वह अगले सफर पर जरूर जाएगा,

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