मन की जीत एक कहानी, kahani hindi mai

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मन की जीत एक हिंदी कहानी (kahani hindi mai) आपको पसंद आएगी,क्योकि अगर हम मन में कुछ भी सोचते है उसी के अनुसार हम चलने लगते है लेकिन क्या वह सही है इस बात की चिंता नहीं करते है बल्कि हमे सोचकर ही आगे बढ़ना चाहिए.

मन की जीत एक हिंदी कहानी : kahani hindi mai

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एक परिवार में दो भाई रहते थे, उनके पिताजी ने दोनों को एक ही व्यापार दे दिया था, जिससे वह दोनों अपना व्यापार अच्छे से चला सके और उन्हें कोई भी परेशानी न हो, दोनों भाई की शादी हो गयी थी, दोनों भाई अपना व्यापार अच्छे से चला रहे थे, उनका जीवन अच्छे से गुजर रहा था,

 

एक दिन एक बाबा उनकी दुकान पर आये थे, बाबा बहार खड़े हुए भिक्षा मांग रहे थे, अभी-अभी सुबह का वक़्त हुआ था, दोनों भाई अपनी दुकान को खोलकर सफाई कर रहे थे, जब छोटे भाई ने देखा की बाबा आये तो वह अपने बड़े भाई से कहने लगा की सुबह-सुबह यह बाबा यहां पर आ गए है और अभी तो हमारी बोनी भी नहीं हुई है,

 

यह कुछ देर बाद भी तो आ सकते है तभी बड़ा भाई बोला की होसकता है की इन्हे बहुत जरूरत हो इसलिए यह आ गए है, हमे इन्हे कुछ दे देना चाहिए यही हमारा कर्म है, लेकिन छोटे भाई ने कहा की हमे ऐसा नहीं करना चाहिए आप तो जानते ही है की अगर हमारी बोनी नहीं होती है तो इससे हमारा दिन भी भी बेकार ही जाएगा, लेकिन बड़े भाई ने उन्हें कुछ दिया और वह आगे चले गए.

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इस बात पर छोटा भाई बहुत गुस्सा हो गया था मगर उसने कुछ नहीं कहा था, दोनों भाई सफाई करके अपनी दुकान पर बैठ गए थे, उस दिन ऐसा हुआ था की एक भी ग्राहक नहीं आय था और पूरा दिन ऐसे ही चला गया था, जब शाम हुई तो छोटे भाई ने कहा की आज आपकी एक गलती से हमारा बहुत नुक्सान हो गया है आज कोई भी नहीं आया है, और हमे खाली हाथ ही घर जाना होगा,

 

इस पर बड़े भाई ने कहा की अगर आज ऐसा ही होना था, तो ऐसा ही हुआ है, इसमें किसी की भी कोई गलती नहीं है, अगर हम ऐसा न करते तो हमारे दरवाजे पर आया कोई भी आदमी खाली हाथ ही जाता जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए लेकिन छोटा भाई तो अपने मन में यह बात समै चूका था की गलती भाई की है, और इसी कारण ऐसा हुआ है,

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दोनों भाई घर पहुंच चुके थे, आज छोटे का मन किसी भी बात में नहीं लग रहा था, आज उसने खाना भी नहीं खाया था, क्योकि वह सारी गलती भाई की ही मान रहा था, अब छोटा भाई सोच रहा था की मुझे कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे की मेरा व्यापार अच्छा चले अगर में भाई के साथ रहता हु तो वैसा हर रोज होगा, इसलिए आज उसने फैसला लिया था की मेरा व्यापार अलग होना चाहिए,

 

जब सुबह हुई तो छोटे भाई ने अपने पिताजी से इस बारे में बात की, लेकिन वह मानने  को त्यार नहीं थे, जब बड़े को यह बात पता चली तो उन्हें भी बहुत दुःख हुआ क्योकि वह एक साथ में काम करना चाहते है मगर लगता है की ऐसा अब नहीं होने वाला है, छोटा भाई अब किसी की भी बात नहीं सुन रहा था, वह तो अपना व्यापार अलग करने में ही राजी था, कुछ देर बाद फैसला हो गया था और छोटे का व्यापार अलग हो गया था,     

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अब छोटे भाई ने सोचा की अब मेरा व्यापार बहुत अच्छा चलेगा, छोटे भाई की दुकान कुछ दुरी पर थी, और बड़े भाई की दुकान भी उसी और थी, अब दोनों साथ में नहीं जाते थे, लगभग बोलना भी कम हो गया था, क्योकि छोटे भाई के अंदर अब ईर्ष्या ने जन्म ले लिया था, कुछ दिन तक छोटे भाई की दुकान बहुत अच्छी चली थी, और वह अब फुला नहीं समा रहा था, अब उसके अंदर घमंड ने भी जगह बना ली थी,

 

बड़ा भाई अपने अनुसार ठीक चल रहा था, उसे तो यह बात सता रही थी, की छोटे का काम अच्छा चल भी रहा है या नहीं, लेकिन जब उन्हें इस बात का पता चला की अब छोटे उनसे बात भी नहीं करता है तो उन्हें बहुत दुःख हुआ था, और अपनी गलती पर पछतावा हो रहा था, की अगर में उस दिन उस बाबा पर ध्यान न देता तो आज छोटा भाई भी मेरे साथ में होता, मगर यह कोई नहीं जानता है की किसके मन में क्या चल रहा था,

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कुछ दिन बीत गए थे, तब अचानक ही एक बाबा छोटे भाई की दुकान पर आये और भिक्षा मांगी, छोटे भाई ने मना कर दिया था, कहा की बाद में आना, बाबा वहा से चले गए थे, अब छोटे भाई का व्यापार कुछ ठीक नहीं चल रहा था, ऐसा कैसे हो सकता है वह सोच रहा था, मगर कुछ भी समझ नहीं आ रहा था, अभी तक तो बहुत अच्हावयापार चल रहा था, मगर अब कुछ दिनों से पता नहीं क्या हो गया है,

 

जब छोटा भाई घर आया तो उसके पिताजी ने पूछा की व्यापार केसा चल रहा है, छोटा भाई बोला की सब ठीक है अच्छा चल रहा है मगर वह सच नहीं बोल पा रहा था, कारण यह था की वह किसी की भी बात नहीं सुनता था, इसलिए उसे परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, अब वह परेशान रहना लगा था, एक दिन वह अपनी दुकान पर बैठा कुछ सोच रहा था,

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तभी सके मन में यह ख्याल आया की मुझे अपने बड़े भाई के पास चलना चाहिए में अपने घमंड में उनसे बात करना भी भूल चूका हु, मेरी वजह से सभी लोग परेशान है यह मेरी ही गलती है जिससे सभी दुखी है, यह सोचता हुआ वह अपने बड़े भाई के पास गया और बोला की मुझे माफ़ कर दो मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था, बड़े भाई ने कहा की कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है,

 

अगर मन में पछतावा आ जाता है तो हमारे अंदर से सभी गाला धारणा अपने आप ही निकल जाती है  इस तरह दोनों भाई फिर से एक होकर काम करने लग गए थे, यह बात सही है की हम जब एक साथ मिलकर कोई काम करते है तो हम उस काम को बहुत आगे ले जा सकते है और अलग होते ही हमारी ताक़त भी बट जाती है, इसलिए एक साथ मिलकर काम करे और एक साथ मिलकर रहे तभी हमे सच्ची खुशिया मिलती है,

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