लालच की बाल्टी कहानी, hindi ki kahaniya

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हमे कभी भी लालच नहीं करना चाहिए लालच में इंसान दुसरो का बुरा करने लगता है इसलिए ऐसा कभी भी नहीं करना चाहिए, यह कहानी लालच की बाल्टी कहानी, (hindi ki kahaniya) हमे यही बताती है.

लालच की बाल्टी कहानी : hindi ki kahaniya

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एक व्यापारी था उसका व्यापार बहुत अच्छा चल रहा था लेकिन एक  दिन का अचानक ही उसका व्यापार धीरे-धीरे कम होने लगा और उसे भारी नुकसान हुआ जब उस व्यापारी को लगा कि उसे बहुत सारा नुकसान हो रहा है तो वह धीरे-धीरे अपनी संपत्ति को खो रहा है उसने बहुत कोशिश की लेकिन वह अपने व्यापार को अच्छी तरह से नहीं चला पा रहा था

 

तभी उसने मन में विचार बनाया है कि मेरी संपत्ति धीरे-धीरे समाप्त हो गई है इसलिए मुझे यहां से चलना चाहिए और कोई दूसरा व्यापार कर लेना चाहिए व्यापारी के पास एक पीतल की बहुत ही भारी बाल्टी थी यह बाल्टी उसकी पारिवारिक बहुत सालों से उसके पास थी उसे बेचना नहीं चाहता था इसलिए वह एक सेठ के यहां पर उस बाल्टी को रख कर चला गया व्यापारी ने कहा कि जब मैं वापस आऊंगा तो अपनी बाल्टी ले लूंगा सेठ ने कहा कि जब भी तुम आओगे तो यह बाल्टी तुम्हें मिल जाएगी

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व्यापारी दूसरी जगह पर व्यापार करने चला गया जब उसे बहुत साल बीत गए बहुत सारा धन कमाया तो वह अपने नगर में वापस आया और फिर उसने अपनी बाल्टी मांगी सेठ बोला कि उसे दीमक लग गई थी जिसके कारण धीरे-धीरे बाल्टी समाप्त हो गई अब तो तुम्हे बाल्टी नहीं मिल पाएगी व्यापारी कहने लगा ठीक है जब बाल्टी में दीमक लग गई है तो कोई बात नहीं है उस व्यापारी ने कहा कि मुझे यहीं पर एक दुकान वाले के पास जाना है अगर तुम अपनी बेटी को मेरे साथ भेज दो तो बहुत अच्छा होगा क्योंकि मैं उस दुकान का पता नहीं जानता

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सेठ ने कहा ठीक है तुम मेरी बेटी को साथ में ले जाओ जब व्यापारी सेठ की बेटी को ले गया तो उसके बाद व्यापारी बहुत देर तक नहीं आया सेठ ने सोचा कि यह तो बहुत देर हो गई मुझे चलकर देखना चाहिए वह कहां पर गया है तो वह व्यापारी से मिला और अपनी बेटी के बारे में पूछा उस आदमी ने कहा कि तुम्हारी बेटी को तो बहुत सारी चींटियां अपने यहां ले गई है जो मैंने देखा तो उसके पैरों में बहुत सारी चींटियां लगी हुई थी और धीरे-धीरे उसे ले जा रही थी मैं कुछ भी नहीं कर पा रहा था

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सेठ बोला तुम झूठ बोलते हो फिर बोला कि इतनी सारी चींटियां मेरी बेटी को नहीं ले जा सकती इसका मतलब तुमने उसे कहीं पर छुपाया है फिर व्यापारी ने कहा कि जिस प्रकार मेरी बाल्टी को दीमक खा सकती है उसी प्रकार तुम्हारी बेटी को बहुत सारी चींटियां ले जा सकती हैं सेठ को सारी बात समझ में आ गई सेठ ने उस व्यापारी की बाल्टी वापस कर दि और अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी हमें लालच में कभी भी किसी के साथ बुरा नहीं करना चाहिए और कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए.

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