राजा की समस्या हिंदी कहानी-king story in hindi

king story in hindi

राजा की समस्या हिंदी कहानी (king story in hindi) आपको पसंद आएगी हम कभी-कभी किसी कारणवश अपने कार्यो को बीच में छोड़ देते है उन्हें पूरा नहीं करते है इससे हमारे जीवन पर प्रभाव पड़ता है इसलिए सोचकर ही फैसला ले.

राजा की समस्या हिंदी कहानी : king story in hindi

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राजा को भी जल्दी ही अपना एक फैसला करना था राजा यह भी जानता था कि उसे कुछ दिन बाद अपना राज्य छोड़ कर जाना होगा क्योंकि उसका मन अपने राज्य में बिल्कुल भी नहीं लग रहा था राजा नहीं है बात किसी को भी नहीं बताई थी वह हमेशा परेशान रहता था और यही सोचा करता था कि मैं राज्य के लिए कुछ भी नहीं कर पा रहा हूं

 

1 दिन राजा अकेला बैठा हुआ था तभी यह महामंत्री वहां पर आए और पूछने लगे कि आप परेशान दिखाई देते हैं आपको क्या हुआ है आप कुछ दिन से कुछ खा भी नहीं रहे हैं राजा ने कहा कि मैं अपने राज्य के लिए कुछ भी नहीं कर पाया इसलिए मुझे अपने आप पर ही अफसोस हो रहा है मुझे अपने राज्य के लिए बहुत कुछ करना था लेकिन मैं कुछ भी नहीं कर पा रहा हूं क्योंकि मैं बहुत अधिक बूढ़ा हो गया हूं जैसे बुढ़ापा बढ़ता जा रहा है मेरी सोच भी धीरे-धीरे कम हो रही है मैं अपने राज्य को सही तरह से नहीं चला पा रहा हूं

 

इसलिए मैं है यह राज्य छोड़ कर जाना चाहता हूं महामंत्री ने कहा कि आपको यह नहीं सोचना चाहिए आप को राज्य के प्रति अच्छे कार्य करने चाहिए और बुढ़ापा आपकी सोच को कम नहीं कर रहा है अगर आप जो चाहे वह कर सकते हैं अगर आप अपनी सोच को बहुत धीमा कर देंगे तो इससे राज्य पर बुरा असर पड़ेगा लेकिन राजा को महामंत्री की बात तो कुछ समझ में नहीं आ रही थी इसलिए वह इस बात को मानने को तैयार नहीं थे महामंत्री भी बहुत ही चिंता में पड़ गया था क्योंकि राजा राज्य को छोड़ कर जाना चाहता है और इससे प्रजा पर बहुत बुरा असर पड़ेगा

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यह बात सोचकर महामंत्री रानी से मिलने के लिए गया और पूरी बात रानी को बताइए रानी को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था वह राजा के पास गई और कहने लगी कि आपको ऐसा नहीं सोचना चाहिए राजा के कोई भी संतान नहीं थी इसलिए वह हमेशा चिंता में लगा रहता था क्योंकि उसके बाद उसका राज्य कौन संभालेगा यह बात भी राजा को बहुत सताती थी लेकिन वह बुढ़ापे आने के कारण ही बहुत कमजोर हो गया था रानी ने भी राजा को बहुत समझाया लेकिन राजा ने अपनी रानी की बात नहीं सुनी और महल से बाहर जाने की इच्छा जताई

 

कुछ देर बाद ही राजा बाहर निकल पड़े और घूमते हुए एक नगर में पहुंचे जब वह नगर में पहुंचे तो उनकी नजर एक दुकान पर गई वहां पर बहुत ही बुढ़ा आदमी लकड़ियों का सामान बना रहा था उसकी उम्र देखकर ऐसा लगता था कि वह बहुत साल का हो गया है जबकि राजा की उम्र इतनी नहीं थी राजा उसे देख रहा था वह बूढ़ा अपने काम में लगा हुआ था और वह अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रहा था राजा उसके पास गया और उससे मिला वह बूढ़ा आदमी अपनी दुकान पर बैठा हुआ था राजा को देख कर खड़ा हो गया और पूछने लगा कि आपको क्या सामान चाहिए

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राजा ने कहा कि तुम यह काम कब से कर रहे हो वह बुढ़ा आदमी बोला कि मुझे इस काम में बहुत साल हो गए हैं और मुझे अपना काम बहुत पसंद आता है इसलिए मेरा मन भी इस काम को छोड़ने के लिए नहीं करता है राजा ने उस बूढ़े आदमी की बात सुनी और उसकी बात से राजा बहुत ही प्रभावित हो गया था और वह समझ चुका था कि जब यह बुढ़ा आदमी अपनी दुकान पर काम कर सकता है तो क्या मैं राजा अपनी प्रजा के लिए और काम नहीं कर सकता राजा यही विचार करता हुआ अपने महल की ओर जा रहा था

 

तभी रास्ते में ऋषि मुनि राजा से मिले और पूछने लगे कि आप नगर में गए थे आपको वहां पर कुछ काम था ऋषि मुनि की बात सुनकर राजा अपने घोड़े से उतरकर ऋषि मुनि के पास गए और पूछने लगे कि क्या मैं बूढ़ा हो गया हूं ऋषि मुनि ने कहा कि आप यह क्यों समझते हैं अगर आप अपना काम अच्छी तरह से कर सकते हैं तो आप बूढ़े नहीं हुए हैं हमारे शरीर जब तक चलता है तब तक हमें काम करते रहना चाहिए अगर हम अपने शरीर से काम नहीं लेते तो इससे हमारा शरीर कमजोर हो जाता है और जिसके कारण हम कुछ भी नहीं कर पाते हैं राजा ने ऋषि मुनि की बात सुनी और वह सब कुछ समझ गए थे

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उसके बाद राजा ऋषि-मुनि से आज्ञा लेकर अपनी महल की और निकल पड़े जब राजा महल में पहुंचे तो उन्होंने महामंत्री को बुलाया और उन्हें आदेश दिया कि नगर में जो-जो कार्य होने हैं उनकी एक सूची तैयार करो और अगर हमारे सैनिक कम पड़ रहे हैं तो एक नई भर्ती का भी आयोजन करो कुछ दिन बाद महामंत्री एक सूची तैयार करके लाए जिसमें नगर की समस्याओं का विवरण था और वह सभी समस्याएं जल्द से जल्द समाप्त होनी थी

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राजा ने जब अपने नगर की समस्याओं के बारे में सुना तो वह सोचने लगे कि मैं इस राज्य को छोड़कर जाना चाहता था जबकि हमारी प्रजा के लिए मुझे बहुत कुछ करना चाहिए और उनकी समस्याओं का निवारण भी करना चाहिए क्योंकि हम राजा हैं और हमें ही सब कुछ सोच कर चलना चाहिए इस तरह राजा अपनी प्रजा की समस्याओं को दूर करने में लग गया इंसान को भी सोचना चाहिए कि जब तक वह काम कर सकता है उसे करना चाहिए क्योंकि काम करने से हमारे शरीर चलता है और जिससे हमें आगे बढ़ने में मदद मिलती है.

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