अकबर बीरबल, akbar birbal hindi

akbar birbal hindi

अकबर बीरबल हिंदी 

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 akbar birbal hindi, एक बार राजा अकबर और बीरबल दोनों बातें कर रहे थे तभी राजा को ध्यान आया है कि उनके शहजादे को अंगूठे चूसने की आदत पड़ गई है और यह बहुत ही बुरी आदत थी राजा ने बीरबल को यह बात करता है और कहा कि




इसे आदत को कैसे छुड़ाया जाए सभी दरबारियों में से एक दरबारी ने कहा कि इस आदत को छुड़ाने के लिए आपको एक बाबा है जो बहुत प्रसिद्ध हैं उन्हें बुलाना चाहिए वह इस आदत को आराम से छुड़वा सकते हैं सभी राजा ने उससे बाबा को बुलाने के लिए कहा गया




अगले दिन बाबा जी दरबार में हाजिर हुए और उन्हें पूरी बात बताई गई कि शहजादा है को अंगूठी छुपाने की बुरी आदत पड़ी हुई है तो इसको कैसे छुड़ाया जाए बाबा ने राजा की बात सुनी और कहा कि मैं कल फिर आऊंगा  और वहां से चले गए

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राजा और उनके दरबारियों को यह बात अच्छी नहीं लगी कि बाबा जी आए भी और बिना इलाज करें ही वापस चले गए अगले दिन बाबाजी आए और शहजादे से मिले शहजादी से मिलने के बाद बाबाजी ने उन्हें कुछ समझाया.

 

उसके बाद  शहजादे ने बाबा जी की बात को मान लिया और कभी भी अंगूठा चूसने के लिए मना कर दिया अब इसके बाद बाबा जी दरबार में आए और राजा ने कहा कि यह काम तो तुम कल भी कर सकते थे फिर राजा ने कहा कि हमें लगता है कि तुम राज दरबार की तोहीन कर रहे हो

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उसके बाद दरबारियों ने कहा कि बाबा जी को इस बात के लिए सजा मिलनी चाहिए कुछ देर सोचने के बाद राजा नहीं दिखा कि हां सजा बाबा जी को जरूर मिलना चाहिए पर सजा क्या देखी जाए इस बारे में सभी दरबारी आपस में बातें कर रहे थे

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सभी राजा ने बीरबल से पूछा कि तुम्हारी राय क्या है क्या सजा मिलनी चाहिए बाबा जी को इस पर बीरबल जी ने कहा कि हमें सीख लेनी चाहिए बाबा जी से वह सजा के हकदार नहीं है इस पर राजा को गुस्सा आया कि तुम भी  बाबा की तारीफ कर रहे हो जब कि उन्होंने दरबार की तौहीन की है

 

बीरबल ने कहा जी यह  तोहीन की बात नहीं है जय बाबाजी कर लो यहां पर आए थे तो वह चूना खा रहे थे और जब राजा ने अपने शहजादे को सुधारने की बात कही तो  बाबा जी को अपनी गलती का एहसास हुआ कि वह भी आदत के शिकार हो गए थे

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अभी जब बाबाजी आ जाए तो अपनी आदत को सुधार कर आए तभी वह शहजादी की आदत की बात कर सकते थे इस पर बीरबल जी ने कहा कि जब तक हम अपनी आदत खुद नहीं सुधरेंगे तब हम किसी और को नहीं सुधार सकते हैं

 

जब हम अपनी आदत सुधार लेंगे तभी हम दूसरों को सुधार पाएंगे यह बात सुनकर सभी राज्य के दरबारी भी सोच में पड़ गए कि हां बाबाजी सजा के हकदार नहीं हैं और मैं बाबा जी से भी सीख लेनी चाहिए अपनी गलतियों को सुधारने के लिए फिर राजा ने बाबा जी को इनाम दिया और वह खुशी-खुशी अपने  घर को लौट गए

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 akbar birbal hindi, दोस्तो इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि जब तक हम अपनी गलतियों को खुद नहीं सुधारेंगे तब तक हम दूसरों को सुधारने की बात भी नहीं कर सकते जब हम अपने आप को सुधार लेंगे तब हम दूसरों को राय देने लायक हो जाएंगे.

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