घोडा गाड़ी, upanyas in hindi

upanyas in hindi

घोडा गाड़ी

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upanyas in hindi

upanyas in hindi, novel in hindi, ट्रेन जब चली तो सभी लोग अपने बैठने की जगह तलाश करने लगे जिसे जो जगह मिली वो वही पर बैठ गया, ट्रेन शाम सात बजे अपने स्टेशन से चली थी और जहा पहुंचना था वहां पर ट्रेन सुबह आठ बजे तक पहुंच जाती है रात का सफर नींद न आने के कारण कभी आंखे बंद और खुलती थी

 

सामने की सीट पर एक छोटा बच्चा जब उठता तभी रोने लगता शायद ये भूख के कारण ही रो रहा था जैसे तैसे रात कट गयी और स्टेशन भी आ गया था जिस गांव में जाना था वहां के लिए कोई भी सवारी नहीं मिल रही थी कोई भी जाने को तैयार ही नहीं हो रहा था क्योकि गांव का रास्ता लगभग आठ किलोमीटर का होगा इसलिए कोई भी तैयार नहीं था

 

किसी व्यक्ति ने बताया की उस गांव के लिए कोई भी सवारी नहीं मिलती है आपको अगर वहां पर जाना है तो घोड़ागाड़ी ही मिल सकती है उसने बताया की उस गांव में सिर्फ एक व्यक्ति ही घोड़ागाड़ी लेकर जाता है अभी वो आया नहीं है आप थोड़ा इंतज़ार कर लीजिये जैसे ही आ जाए तो आप उसके साथ चले जाना

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   टाइम से तो आ गए पर अब लगता है की यही पर इंतज़ार करना पड़ेगा पर इंतज़ार भी कितना, अब पता नहीं वो कब तक आएगा और आएगा भी नहीं तो क्या यही पर ही रहना पड़ेगा बहुत सारे विचार मन में चल रहे थे, अब इन विचारो के चलते यही बात मन आयी की लगता है खुद ही चलना पड़ेगा

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किसी व्यक्ति से फिर रास्ता पूछा और गांव की और निकल पड़े आठ किलोमीटर कम नहीं होता है पता नहीं कितना चलना पड़ेगा पर चलना तो है ही अब क्या सोचना और सोचते हुए चल पड़े, इस गांव में हमारे पुराने मित्र रहते है और काफी समय हो गया था उन्हें इस गांव में आये पता चला की उनकी तबियत ठीक नहीं है इसलिए मिलने चले आये

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अब ये तो पता नहीं था की गांव में जाने के लिए कोई साधन नहीं है अब ये तो वही बात हुई की आये तो हाल पूछने पर अपना ही हाल क्या है ये पता नहीं अब मन में यही विचारो का ख्याल चल रहा था और अब लग रहा था की ज्यादा चल नहीं पायंगे

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थोड़ी दुरी पर एक बोर्ड लगा था की यह से गांव पांच किलोमीटर में है पांच किलोमीटर और जानकार तो पेरो ने भी जवाब देना शुरू कर दिया अब तो यही लग रहा था की कही पर बैठ कर थोड़ा आराम कर लिया जाए तभी आगे की और चला जाए 

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एक पेड़ की और नज़र गयी और वही पर बैठ गए बैठे हुए थोड़ी देर ही हुयी थी की कुछ आवाज आने लगी ये आवाज किसी स्कूटर की थी शायद कोई आ रहा था अब शायद लगता था की समस्य पर पाउच जाएंगे स्कूटर वाले से मदद ली और जैसे तैसे गांव में पहुंच गए,

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पहुंचने के बाद लगा की सब कुछ मिल गया लगता है जी में जान आ गयी अपने मित्र से मिले और साड़ी बात बताई मित्र को जानकार थोड़सी हसी आयी और कहा की आपको तो बचपन की याद आ गयी उसे हसी आ रही थी और हमे यही लग रहा था की आज पहुंच भी जायँगे या नहीं,

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upanyas in hindi, novel in hindi, हमारे बीच काफी बाते हुई और अपने बचपन की यादे भी ताज़ा हो गयी और दो दिन बाद वहां से वापस आ गए शायद ये हमारे यादो के पलों में यादगार पल था

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