रेल का डिब्बा, hindi kahani

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हिंदी कहानी :- रेल  का डिब्बा

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hindi kahani, हम सभी रेलगाड़ी का इंतजार कर रहे थे , हम सब यानी अनगिनत लोग , सभी गाड़ी में चढ़ने के लिए तैयार थे , गाड़ी आयी और रुकी सभी गाड़ी में चढ़ गए , और रेलगाड़ी चल दी , डिब्बे में देखा की बहुत से लोग बैठे है, बस में भी जगह देखकर बैठ गया , लोग न जाने क्या बात कर रहे थे , या युही समझिये की लोग एक दूसरे से अनजान थे बस आपस में बात कर रहे थे , 

 

थोड़ी देर मैं एक चायवाला आया, कुछ ने चाय ले ली और मैने सोचा की में भी ले ही लू पर एक अजीब से आवाज आयी , मेरा तो समान ही लूट गया क्या कर अगर अकेला होता तो शायद ऐसा न होता पर बीवी बच्चे के ध्यान से में समान पर ध्यान ही नहीं रख पाया , अब क्या करू. उस व्यक्ति की उम्र लगभग चालीस साल की होगी उसके दो बच्चे पर ज्यादा उम्र नहीं थी बच्चे की. 

उस व्यक्ति ने मुझसे मदद मांगी, की मेरा सारा समान लूट गया है. मेरे पास कुछ नहीं है. सब कुछ समान में ही रखा था. मेरा बच्चा भूखा है उसे कुछ खाने को दे दीजिये. मेने देखा की बच्चे का चेहरा लाल था और वो महिला उसके पास खड़ी थी.

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महिला बड़ी ही दुखी लग रही थी , अब में सोच रहा था की क्या करू इसकी कहानी पर विस्वास करू या न करू क्योकि आजकल बहुत से ठग ऐसे ही काम चलाते है. 

 

मेने कहा की कही तुम ठग तो नहीं हो, इस बात को सुनकर वो चुप हो गया और वही नीचे ही बैठ गया और साथ ही उसकी पत्नी भी वही बैठ गयी, उसकी पत्नी की आँखों में असू थे और मेरे मन मैं विचार चल रहे थे की मदद करू न करू,

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उनकी बातो पर ध्यान दिया तो लगा की ये बड़ी दूर से आ रहे थे उनकी भाषा चेन्नई की लग रही थी , पर मन की आवाज आयी शायद ये झूटे तो नहीं है. 

 

सोचा की थोड़ी देर और देखता हु, और एक चाय चायवाले से ली , चाय पिने लगा उसकी बातो मैं तो भूल ही गया था की मुझे चाय पीनी थी, चाय पीते-पीते सोच ही रहा था की क्या करू, 
की आवाज आयी दूध वाला दूध ले लो , दूध फिर दिमाग मैं आया की अब चाय वाला आया अब ये दूध वाला.

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फिर उस आदमी ने कहा की बच्चे को दूध ही पिला दो ये रो रहा है. मेने कहा की तुम लोग यही काम रोज करते हो, इस बात को सुनकर महिला फिर रोने लगी, अब में ये सोचने लगा की ये क्या हो रहा है, दिमाग फैसला भी नहीं ले पा रहा है की ये सच्चे या झूटे,  बस मन मैं विचार  ही दौड़ रहे थे,  

 

तभी दूध वाले ने कहा की तुम लोग फिर, उसने कहा की ये तो पहले भी दूध माग रहे थे अभी तक यही , आदमी ने कहा की थोड़ा दूध दे दो भईया बच्चा रो रहा है. दूधवाले ने मना कर दिया. 

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मुझे थोड़ा विस्वास हो रहा था की शायद ये सच बोल रहे है, ये आपस मैं बात कर रहे थे की बच्चे रोये जा रहा है, इसे कुछ खाने के लिए ला दो, ये सुबह से भूखा है. थोड़ी देर बाद छोलेवाला आ गया छोले ले लो मैने उसे छोले और दूध दिलवा दिए . वो बड़े खुश हुए और उन्होंने मुझे धन्यवाद दिया.

 

और उस आदमी ने कहा की मेरी थोड़ी और मदद करदीजिये मेने कहा क्या, उसने कहा की हमारे टिकेट का इंतेज़ाम कर दीजिये हम अपने घर वापिस चले जायँगे. 

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मेने उसे टिकेट के पैसे दे दिए , शायद अब मेरा स्टेशन भी आ गया था , अब मुझे उतरना था, मैं उत्तर गया और उस आदमी ने धन्यवाद् दिया और में चल दिया, 

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hindi kahani, इस रेलगाड़ी में न जाने कितने लोग मिलते है. अच्छे भी और बुरे भी सभी और ध्यान रखना चाहिए शायद कुछ सफर यादगार बन जाते है.  

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