बैलगाड़ी का सफर हिंदी कहानी, Story in hindi

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बैलगाड़ी का सफर हिंदी कहानी, (Story in hindi) यह कहानी दो दोस्त पर है. जब उसका दोस्त मोहन सिंह पहली बार उस गांव में आता है, तो उसे बहुत सी मुसीबत का सामना करना पड़ता है, उसके बाद वह अपने दोस्त के घर पहुँचता है, यह कहानी आपको पसंद आएगी,

बैलगाड़ी का सफर हिंदी कहानी : Story in hindi

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Story in hindi

अभी पूरी तरह से शाम नहीं हुई थी अभी शाम होने में काफी समय बचा हुआ था तभी रेल गाड़ी समय पर पहुंच गई थी और सभी लोग उससे उतरने लगे थे मोहन सिंह पहली बार उस गांव में आए हुए थे वह पहली बार अपने दोस्त से मिलने आ रहे थे उन्हें उस गांव के बारे में कुछ भी पता नहीं था वह यह भी नहीं जानते थे कि गांव स्टेशन से कितनी दूरी पर है

 

मोहन सिंह स्टेशन से बाहर आए और एक आदमी से पूछा कि मुझे इस गांव में जाना है यह गांव कितनी दूरी पर पड़ेगा तभी उस आदमी ने बताया कि यह गांव यहां से 7 किलोमीटर की दूरी पर पड़ेगा 7 किलोमीटर की दूरी सुनकर मोहनसिंह काफी घबरा गए थे क्योंकि उनकी काफी उम्र भी हो चुकी थी और वह पैदल नहीं चल सकते थे तभी उन्होंने कहा कि क्या यहां पर कोई साधन है जो मुझे उस गांव में छोड़ सकता है तभी उस आदमी ने बताया कि यहां पर बैलगाड़ी चलती है और वह भी अब आखरी है अगर आपको वह मिल जाए तो आप उस गांव में पहुंच सकते हैं

 

इसके बाद यहां पर कोई भी साधन आपको नहीं मिलने वाला मोहन सिंह ने आदमी से पूछा कि बैलगाड़ी वाला कहां पर है तभी उस आदमी ने कहा की आप 5 मिनट की दूरी पर थोड़ा सा चलेंगे तो आपको बैल गाड़ी खड़ी हुई दिखाई देगी वह आखरी ही है इसके बाद कोई भी बैलगाड़ी आप को नहीं मिलेगी आपको जल्दी करनी चाहिए क्योंकि शाम होने वाली है मोहन सिंह ने थोड़ा अपने कदम जल्दी-जल्दी बढ़ाएं क्योंकि अगर वह बैल गाड़ी छूट गई तो उन्हें पैदल जाना पड़ेगा और पैदल चलना उनके बस में नहीं है मोहन सिंह ने देखा कि बैलगाड़ी वाला खड़ा हुआ है मोहन सिंह ने बैल गाड़ी वाले को देखकर काफी अच्छा महसूस हुआ क्योंकि उन्हें लग रहा था कि कहीं बैलगाड़ी वाला चला ना जाए

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तभी वह बैलगाड़ी वाले के पास गया और कहा कि मुझे इस गांव में जाना है बैल गाड़ी वाले ने कहा बैठ जाइए और मैं कुछ देर में यहां से चलने वाला हूं बैलगाड़ी में पहले से ही 2 लोग और बैठे हुए थे वह भी उसी गांव में जाने के लिए तैयार थे इसके बाद बैल गाड़ी वाला आया और कहने लगा कि अब हमें चलना चाहिए क्योंकि काफी दूरी तय करनी है और शाम हो चुकी है बैलगाड़ी वाला सभी को लेकर धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा

 

बैलगाड़ी वाला धीरे-धीरे जा रहा था मोहन सिंह पहली बार उस गांव में जा रहे थे इसलिए उस गांव के बारे में ज्यादा तो नहीं जानते थे लेकिन वह यह सोच रहे थे कि इस गांव में और कोई भी साधन नहीं है और यही एक बैलगाड़ी है जो मुझे उस गांव तक पहुंचा सकती है बैलगाड़ी कुछ ही दूरी पर पहुंची थी तभी बैलगाड़ी वाले ने देखा कि एक पुल टूटा हुआ है गांव में जाने के लिए दो पुल थे जिनमें से एक पुल टूटा हुआ था शायद बारिश हो जाने की वजह से उस पुल में गिरावट आ चुकी थी मोहन सिंह ने पूछा कि क्या बात है तभी बैलगाड़ी वाले ने कहा कि यहां का पुल टूटा हुआ है हमें थोड़ा आगे चलकर दूसरे पुल से  गांव के अंदर जाना होगा और यहां से दूसरे पुल की दूरी 1 किलोमीटर और बढ़ जाएगी यानी कि हम कह सकते हैं कि अब गांव की दूरी 8 किलोमीटर की हो चुकी है

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अब हमें 8 किलोमीटर तय करना होगा मोहन सिंह को थोड़ी घबराहट हो रही थी क्योंकि वह उस गांव के बारे में नहीं जानते थे और पहली बार उस गांव में आ रहे थे अंधेरा हो चुका था और कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था रास्ते पर कोई रोशनी नहीं थी सिर्फ हल्की हल्की सी रोशनी चांद की दिखाई दे रही थी जिसपर में चले जा रहे थे  सभी लोग जानते हैं कि जब पहली बार कोई व्यक्ति किसी अनजान जगह जाता है तो थोड़ी घबराहट तो उसके सामने होती है और उस पर से उसे जाने में अंधेरा हो चुका था यह भी घबराहट का कारण बन रहा था मोहन सिंह ने पूछा कि क्या तुम इस रास्ते पर बैलगाड़ी बहुत अच्छी तरह से चला सकते हो बैलगाड़ी वाले ने कहा कि मैं हर रोज यहां से ले जाता हूं मुझे यहां का सारा रास्ता पता है मैं आराम से आपको उस गांव में पहुंचा दूंगा

 

मोहन सिंह बैलगाड़ी में बैठा हुआ रास्ते को देख रहा था चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा था उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था और उसे साथ में डर भी लग रहा था बैलगाड़ी धीरे-धीरे जा रही थी काफी समय बीत गया था लेकिन गांव दूर तक भी दिखाई नहीं दे रहा था उसके बाद मोहन सिंह ने फिर पूछा कि कितनी देर में गांव में पहुंच जाएंगे तभी बैलगाड़ी वाले ने कहा कि हमें आधा घंटा और लगेगा और हम गांव में पहुंच जाएंगे आधे घंटा सुनकर मोहन सिंह थोड़ा शांत हो गए क्योंकि उन्हें लग रहा था कि अब हम गांव में पहुंचने वाले हैं

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अभी गांव आया भी नहीं था कि मुसीबत सामने आकर खड़ी हो गई थी मोहन सिंह ने देखा कि आगे का रास्ता बहुत खराब हो चुका है बारिश के कारण वहां पर बहुत ज्यादा कीचड़ जमा हो चुका है बैलगाड़ी वाले ने कहा कि आप लोग नीचे उतर जाइए और आप आगे चलिए मैं बैलगाड़ी को यहां से निकाल कर आगे मिलता हूं मोहन सिंह अब घबराहट के कारण बहुत ज्यादा डर चुके थे क्योंकि जब वह नीचे उतरे तब उन्हें दिखाई दे रहा था कि चारों ओर कीचड़ भरा हुआ है बड़ी मुश्किल से वह दूसरी और जाने में कामयाब हो पाए थे सभी लोग नीचे उतरकर धीरे-धीरे कीचड़ भरी सड़क को वह पार कर रहे थे और आगे बढ़ रहे थे दूसरी तरफ बैलगाड़ी वाला बैलगाड़ी को धीरे-धीरे आगे बढ़ा रहा था क्योंकि कीचड़ बहुत ज्यादा जमा हुआ नजर आ रहा था

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सभी लोग दूसरी ओर पार करके खड़े हो गए थे बैलगाड़ी वाला धीरे-धीरे बैलगाड़ी को निकाल रहा था और कुछ देर में बैलगाड़ी भी उस कीचड़ से बाहर आ चुकी थी लेकिन मोहन सिंह के पैरों में बहुत ज्यादा कीचड़ लग चुका था वह सभी लोग बैलगाड़ी में बैठ गए और बैलगाड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी मोहन सिंह ने आज बहुत सारे अनुभव ग्रहण कर लिए थे क्योंकि वह इस तरह की परेशानियों में कभी नहीं पड़े थे आज मैं पहली बार इसका अनुभव कर रहे थे बैलगाड़ी वाले ने कहा कि कुछ ही देर में हम गांव में पहुंचने वाले हैं गांव की सीमा दिखाई दे रही थी अब वह गांव की सीमा के अंदर बैलगाड़ी को ले जा रहे थे बैलगाड़ी धीरे-धीरे चलकर आखिरकार गांव में पहुंची गई थी मोहन सिंह को अब लग रहा था कि अब वह बहुत मुश्किल से इस गांव में पहुंच पाए हैं

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तभी जिनके यहां पर जाना था वहां पर उतरे और उनका दरवाजा खटखटाया तभी अंदर से मोहन के दोस्त आए उन्होंने दरवाजा खोला और देख कर कहा कि मोहन सिंह आज रात को तुम यहां पर कैसे आ गए अभी तो काफी रात हो चुकी है मोहन सिंह ने बताया कि मुझे यह नहीं पता था कि यह गांव काफी दूरी पर है इसलिए मैं समय से नहीं चल पाया था और जब मैं चला तो काफी परेशानियों के साथ में यहां पर पहुंचा हूं इसलिए मुझे रात हो गई है मोहन सिंह अंदर चले गए और अपने दोस्त से बातें करने लगे मोहन सिंह ने अपने दोस्त को सारी बात बताई कि वह किस तरह गांव में पहुंचे हैं तभी उनके दोस्त ने कहा कि आज तो तुम्हें बहुत अच्छा अनुभव प्राप्त हो गया होगा और दोनों दोस्त हंसने लगे.

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