Panchatantra short stories in hindi with moral, गजराज और मूषकराज की पंचतंत्र कहानी

Panchatantra short stories in hindi with moral

गजराज और मूषकराज की पंचतंत्र कहानी, हेल्लो दोस्तों स्वागत है आपका हमारी वेबसाइट में आज में आपको Panchatantra short stories in hindi with moral में विस्तार से बतायूँगा वैसे तो अपने Panchtantra Stories बहुत पढ़ी होंगी परन्तु में आपको ऐसी कहानी के बारे में बतायूँगा जो इतिहास में भी अमर हो चुकी है ये कहानी आपको बहुत ही पसंद आएगी आपको बता दूँ ये कहानी हाथियों के राजा “गजराज “ और चूहों के राजा “मूषकराज “ की है कैसे एक नन्हा सा “मूषकराज” बड़े विशाल शरीर वाले “गजराज “ की मदद करता है आप इस कहानी में हमारे साथ जानेंगे इस कहानी को आप अंत तक पढ़ें

Panchatantra short stories in hindi with moral :- गजराज और मूषकराज की पंचतंत्र कहानी

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Panchtantra Stories in hindi जगत में उन कहानियों में से आती हैं जिनको पढना हर कोई पसंद करता चलिए हम आज एक Panchatantra short stories in hindi with moral शुरू करते हैं बहुत पहले की बात है एक राज्य में एक छोटा सा नगर हुआ करता था उसका नाम “ चंदनपुर “ था वहां का राजा “धूमकेतु “ था राजा अपनी जनता का अपनी जान से ज्यादा ख्याल रखता था परन्तु एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि “नगर “ में बहुत ही भरी मात्रा में बाढ़ आ गयी

 

तब वहां पे सब कुछ नस्ट हो गया राजा अपनी प्रजा की रक्षा न कर सका वहां पे इतना संहार हो गया कि कोई भी मनुष्य वहां पे जीवित नही बचा . राजा का “नगर” और “महल” सब कुछ वहां पे खंडर बन चूका था और वहां पे इतना सुखा पड़ गया कि किसी को भी वहां से कुछ न मिलता न पानी न कुछ और ..फिर एक दिन वहां पे चूहों ने अपने चरण डाले और वहां पे अपना राज्य स्थापित कर लिया

 

चूहों ने अपना राजा “मूषकराज” नामक चूहे को बना दिया वही अपनी प्रजा की देखभाल करता तभी वहां पे भगवान् की ऐसी कृपा हुयी कि वहां पे पानी का एक बड़ा सा तालाब बन गया ये सब कुछ वहां पे चूहों के आने से हुआ था, जिस खंडर में चूहे रहते थे वहां से कुछ दूर एक घना जंगल था वहीं पे बहुत सारे हाथी और अन्य जानवर रहते थे एक दिन सारे जंगले में सुखा पढ़ गया तभी सब जानवर प्यास से तडपने लगे और बहुत से हाथी मरने लगे जब ये सब हो रहा था तब सबने “गजराज “ से कहा कि महराज सहयता करें सब जानवर मर रहे हैं कुछ उपाय ढूढें

 

तब कुछ समय बाद “गजराज” की प्यारी मित्र कोयल वहां पे आई उसने पूछा क्या हुआ “गजराज” क्यों इतने चिंतित हो तब “गजराज” ने अपनी सारी समस्या उसको बताई इसका हल ढूंढने के लिए कोयल यहाँ वहां गयी तब उससे एक बड़ा सा तालाब दिखाई दिया उसने जाके अपने मित्र “गजराज” को बताया कि वहां पे एक बहुत बड़ा तालाब है,अगर आप सब वहां जायेंगे तो आपकी समस्या का हल मिल जायेगा तभी सब हाथी वहां पे गये पानी पीने के लिए जब भी सब हाथी वहां पे जाते उनके पैरों के निचे आके बहुत से चूहे मर गये ये समस्या बहुत दिनों तक चूहों के साथ चलती रही हाथी बार बार आते पानी पीने और हजारों चूहों को अपने पैरों के निचे दबा के मार देते और पानी पीने चले जाते

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जब ऐसा विनाश बहुत होता रहा तो सब चूहे मिलके अपने राजा “मूषकराज” के पास गये उन्होंने जाके इस महा विनाश के बारे में बताया इससे सब चिंतित हो गये तो मूषकराज ने एक सभा बुलाई और सबने अपनी अपनी बात रखी सबकी बात सुनने के बाद यह तय हुआ कि “मूषकराज” गजराज के पास जायेंगे उनको ये सब बता के अपनी समस्या का हल ढूंढेंगे अगले ही दिन मूषक राज “गजराज “ के पास पहुंचे उन्होंने देखा गजराज एक पेड़ के पास बैठा था उसके पास एक बड़ा पत्थर था तभी “मूषकराज” उस पथर पे चढ़ गया और “गजराज “ को बोलने लगा “प्रणाम महाराज “ इस तुच्छ का प्रणाम ले तब “गजराज” ने बोला “बोलो नन्हे मूषक” क्या हुआ क्यों इतने व्याकुल हो

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तभी मूषकराज ने सारी बात “गजराज” को बताई तब “गजराज” ने कहा हमे ये सब पता नही था हमसे अनजाने में बहुत बड़ी  भूल हो गयी हमे क्षमा करें “मूषकराज” हम अपने जाने की जगह को बदल लेंगे कहीं दूर से पानी पीने जायेंगे, तभी “मूषकराज” ने कहाँ धन्यवाद महाराज ..अपने हमारी प्रजाति को नस्ट होने से बचा लिया अगर आपको भी कहीं पे कभी भी हमारी जरुरत हुयी तो हम आपकी सेवा में हाजिर हैं “गजराज” ने सोचा ये हमारे कहाँ काम आएगा

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एक दिन हुआ ऐसा कि एक राज्य के राजा ने सोचा कि हमारी सेना को हाथियों की जरुररत है इससे हमारी सेना और ज्यदा शक्तिशाली हो जाएगी उन्होंने अपने सैनिकों को भेजा और कहा जाओ हाथी पकड़ के लाओ तब उसके सैनिकों ने सारे जंगल में झाल बिछा दिए और बहुत से हाथियों को पकड़ लिया सबको अपनी सेना के लिए ले गये, एक दिन “गजराज” इसी कि चिंता में चला जा रहा था कि उसका पैर एक रस्सी में आगया और झाल में फंस गया “गजराज” जोर जोर से चिंघाड़ रहा था तभी वहां से एक गेंडा गुजर रहा था वो गेंडा “गजराज” का बहुत ही पुराना मित्र था क्योंकि गजराज ने उस गेंडे की मदद की थी गजराज को ऐसे देखा तो उसने कहा महाराज ये क्या होगया ये कैसा अनर्थ है

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तभी गजराज ने कहा कि जाओ जल्दी जाके पास के खंडर से “मूषकराज” को लेके आयो हमारे पास समय नही है तभी वो गेंडा जल्दी दौड़ता हुआ उनके पास गया और जाके सब बताया तभी “मूषकराज” कुछ और चूहों को लेके वहां पहुंचा जहाँ हाथी को बांध रखा था, मूषकराज ने ये सब देखा तो बहुत जल्द ही उस जाल को काट दिया और “गजराज” को उस झाल से मुक्त कर दिया “गजराज’ ने उस नन्हे “मूषकराज” का धन्यवाद किया कहा की अगर आज तुम न होते तो मुझे ये ले जाते इस तरह दोनों में मित्रता और ज्यादा बढ़ गयी और दोनों ख़ुशी ख़ुशी अपने घर चले गये

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दोस्तों आज मैंने आपको “गजराज” और “मूषकराज” की कहानी सुनाई जो आपको बहुत पसंद आई होगी अगर आपको Panchatantra short stories in hindi with moral में और ज्यादा पढनी है तो हमारी इस वेबसाइट से जुड़े रहें आपको और भी आगे ऐसी ऐसी रोचक कहानियां हमारी वेबसाइट पे मिलेंगी

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