चार मित्रो की कहानी, moral hindi story

Moral hindi story | Hindi kahani

moral hindi story, चार मित्रो की कहानी, एक गांव में चार मित्र रहते थे चारों ही बहुत ही पक्के मित्र थे और एक साथ ही पढ़ें और बढ़े हुए थे बचपन से ही में एक साथ पढ़ते थे but कामयाबी पढ़ने में सिर्फ तीन ही मित्रों को मिली चौथे मित्र जो था

चार मित्रो की कहानी : moral hindi story

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moral hindi story

उनका वह पढ़ने लिखने में ज्यादा होशियार नहीं था या उसका मन भी पढ़ाई में नहीं लगता था जब यह चारों मित्र बड़े हुए तब इन्होंने सोचा कि अब क्या किया जाए अब हम काफी बड़े हो गए हैं और कुछ हमें बनना भी चाहिए जिससे हम प्रमुख हो सके तो तीनों में जो पढ़ाई में होशियार थे पढ़ लिख चुके थे वह कहने लगे कि अब हमें अकेले ही जाना होगा हम तीनो एक साथ जाएंगे हम चौथे को नहीं ले जाएंगे

 

Because वह पढ़ा लिखा भी नहीं है और क्या काम करेगा तीनों मित्रों ने एक योजना बनाई कि हमें क्यों ना इस शहर जाकर ही कुछ ऐसा व्यवसाय करना चाहिए जिससे हमारी किस्मत ही बदल जाए और but वह चौथे मित्र को अपने साथ नहीं ले जाना चाहते थे पर बहुत मना करने पर भी चौथे मित्र उनकी बात नहीं मान रहा था मुझे भी शहर जाना है मुझे भी कुछ करना है तो तीनों मित्रों ने आपस में योजना बनाई कि चलो इसे भी ले चलते हैं और जो कुछ कमाएंगे थोड़ा बहुत ही से भी दे दिया करेंगे तो इस प्रकार चारों में शहर की ओर चल दिए चारो मित्र शहर की ओर जा रहे थे

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तो उनके बीच में एक जंगल का रास्ता पड़ता था उसी जंगल से होकर ही शहर का रास्ता जा रहा था और उस रास्ते में जहां पर जंगल पड़ता है वह लोग उस जंगल से गुजरने लगे तभी उन्हें एक वहां पर हड्डियों का ढांचा पड़ा हुआ मिला चारो मित्र डर गए कि कहीं यह ढांचा किसी जानवर का तो नहीं क्या यहां पर कोई ऐसी समस्या तो नहीं मित्र यही बातें आपस में करने लगे जो ढांचा सामने हड्डियों का पड़ा हुआ था उसे देखकर तीनों मित्रों ने सोचा कि हम में से सबसे होशियार कौन है आज हम यह जान जाएंगे उनमें से एक ने कहा कि मैं यह बता सकता हूं कि किसका है

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दूसरा कर ने कहा कि अगर तुमने ढांचा बना दिया तो मैं उसने उसकी खाल डालूं सकता हूं और तीसरे व्यक्ति ने कहा उनमें से किया कर तुम यह दोनों कर सकते हो तो में जान डाल दूंगा इस प्रकार पहले व्यक्ति ने ढांचा बनाना शुरु कर दिया जब ढांचा पूरी तरह बन गया तो दूसरे ने कहा कि मैं जान डाल सकता हूं तो दूसरे व्यक्ति ने इस में खाल डाल दीजिए डालने पर ऐसा लग रहा था कि वह ढांचा शेर का था जब उसने ढांचा तैयार हो गया तब तीसरे ठीक है ने कहा कि अब मेरी बारी है में जान डाल दूं तो भी चौथे ने कहा जो कि बिल्कुल भी पढ़ा हुआ नहीं था

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जिसमें जान मत डाल देना अगर जान डाल दी तो यह में खा जाएगा और उसकी बात किसी ने भी नहीं माने और उसने कहा कि देखो जो तुम्हें करना है कर लो मैं तो पेड़ पर जाकर चढ़ जाता हूं तो अब तुम ही संभालना जो आगे होगा और इस प्रकार चौथा व्यक्ति हो पेड़ पर चढ़ गया और जब शेर में उन्होंने जान डाली तो शेर जिंदा हो गया और जैसे ही शेर जिंदा होगा उसने उन तीनों को खा लिया

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moral hindi story, इस कहानी से यही सीख मिलती है कि जब भी आपको कोई भी काम करना है उस पर आप सौ बार सोचे, अगर आप कोई भी काम बिना सोचे करते है तो उसका परिणाम हमेशा ही उल्टा होता है, कभी कभी ऐसी समस्या भी आ जाती है जिसके बाद आपको सोचने का भी समस्य नहीं मिल पाता है तभी उस काम को करें अन्यथा उस काम को करना व्यर्थ हो जाएगा. चार मित्रो की कहानी, moral hindi story, अगर आपको यह कहानी पसंद आयी है तो जरूर शेयर करे और हमर भी बताये.

 

एक मित्र की अनोखी कहानी : moral hindi story, hindi kahani 

एक मित्र दूसरे से कहता है की मुझे अभी कुछ धन की जरूरत है तुम इस बात को समझ सकते हो, Because में यहां पर किराए पर रहता हु, इसलिए मुझे बहुत समस्या आ रही है में अभी पढ़ाई कर रहा हु अगर तुम मेरी मदद कर सकते हो तो में तुम्हारे पैसे जल्द ही वापिस कर दूंगा but कुछ दोस्ती ठीक हो सकती है उसका मित्र कहता है की अभी मेरे पास नहीं है, वह चला जाता है उसका मित्र कहता है की कोई बात नहीं है,

 

वह किसी से मदद नहीं मांग सकता है Because वह यहां पर नहीं जनता है इसलिए वह कुछ नहीं कर पा रहा था उसके पास जितना धन था वह ख़र्च हो गया था अब उसके पास कोई रास्ता नहीं था वह उस जगह से चला गया था उस जगह पर रहने का मतलब धन की जरूरत का होना था, जब धन नहीं है तो वह उस जगह नहीं रुक सकता था वह बिना बताये ही चला गया था वह किसे कह सकता था जिसे कहा था उसने जवाब दे दिया था, उसने अब आना जाना भी बंद कर दिया था इसी से सब कुछ समझा जा सकता था,

Moral hindi story | Hindi kahani

समय बीत गया था उसका मित्र बहुत दिन बाद उससे मिलने गया था but जब उसे पता चल गया था की उसका दोस्त चला गया है तो उसे अच्छा नहीं लग रहा था but वह जानता था की यह सब कुछ उसने ही किया था उसने मिलना भी छोड़ दिया था जोकि अच्छा नहीं था उसे अफ़सोस था but यह सब कुछ अब अच्छा नहीं था अब वह उससे नहीं मिल सकता था जीवन में ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे दुसरो को तकलीफ हो, अगर आपको यह Moral hindi story, Hindi kahani पसंद आयी है, तो शेयर करे

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