एक सच्ची जीवन की कहानी, simple story in hindi

simple story in hindi

एक सच्ची जीवन की कहानी, (simple story in hindi) आपको जरूर पसंद आएगी क्योकि इसमें आपको जीवन से जुडी कुछ बाते देखने को मिलेगी, जिन्हे हम कभी-कभी भूल जाते है, 

एक सच्ची जीवन की कहानी : simple story in hindi

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simple story in hindi

लड़के की शादी हुई और कुछ दिन तक सब कुछ अच्छा चल रहा था तभी लड़के की नौकरी बहार लग गयी थी, वह अपनी नौकरी पर जाने को त्यार था, मगर उन्होंने ने अपना मकान यहां पर बनवा लिया था इसलिए दूसरी जगह पर मकान को बनाना संभव नहीं था, अगली सुबह ही वह अपने परिवार से विदा लेकर नौकरी पर चला गया था, शरू शरू में सभी लोग अच्छे लगते है,

 

लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ पता चलता जाता जाता है, लड़के की पत्नी हर रोज सुबह उठकर काम पर लग जाती थी, परिवार ज्यादा बड़ा नहीं था मगर उनके काम थोड़े अलग किस्म के थे, पत्नी काम काम खत्म होने ही वाला था की उसके सामने दूसरा काम आ जाया करता था, मानो ऐसा लग रहा था की वह कोई मशीन है, जिससे काम लिया जा रहा है,

 

लड़के को इस बात की कोई खबर नहीं थी, आजकल तो फ़ोन होते है मगर उस समय में मोबाइल फ़ोन नहीं थे, तो बात का पता लग्न थोड़ा मुश्किल था, पत्नी का यह मानना था की जितनी सेवा बड़ो की जाए उतना अच्छा है, इसलिए उसे इस बात की चिंता नहीं थी, वह बताये गए सभी काम कर रही थी,

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एक दिन पत्नी की सहेली उससे मिलने आयी थी, उसने देखा की उसकी सहेली काम में लगी हुई है, वह दोनों एक साथ बैठकर बाते करने लग गयी थी, थोड़ी देर बाद वह चाय का कप लेकर आयी और दोनों की बाते शरू हो गयी थी, तभी बातो-बातो में पता चला की वह बहुत ज्यादा काम कर रही है, उसकी शैली ने उसे समझाया की इस तरफ तो तुम्हारी तबियत खराब हो जायेगी, वह बोली की काम करने से कुछ नहीं होता है, लेकिन उसकी शैली को लग रहा था की यह अच्छी बात नहीं है,

 

अगर वह कुछ दिन तक ऐसा ही करती रही तो बहुत मुश्किल में आ जायेगी, लेकिन उसने उसकी बातो पर ध्यान नहीं दिया था, कुछ दिन बाद उसकी तबियत खराब होने लगी थी, काम का बहुत ज्यादा दबाव भी ऐसा ही करता है, लेकिन वह तबियत खराब में भी काम कर रही थी, यह ठीक नहीं है, ऐसा कुछ लग रहा था की गलत हो रहा है,

 

तभी शाम की गाडी से लड़का भी आ रहा था वह घर पहुंचा तो उसने देखा की उसकी पत्नी काम में लगी हुई है, उसकी हालत अच्छी नहीं लग रही थी बीमार आदमी की शक्ल से पता चल जाता है की वह केसा है, जब लड़के ने उससे पूछा की तुम काम कर रही हो और तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है ऐसा क्यों हो रहा है, बाकी लोग क्या कर रहे है, जो उनका यह भी फर्ज नहीं है की वह तुम्हे देख सके,

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उसके बाद लड़का तुरंत ही बहार गया और डॉ से मिला और उनको अपने साथ में लेकर आया था जब डॉ ने सब कुछ चेक किया तो पता चला की उनकी तबियत बहुत ज्यादा खराब है ऐसा लग रहा है की भुखार बहुत समय से आ रहा था और इन्होने ध्यान नहीं दिया था, इसलिए तबियत बहुत ज्यादा बिगड़ गयी थी, जब डॉ दवाई देकर चला गया तो लड़के ने अपनी माता -पिता को  बुलाया और पूछा की यह सब क्या हो रहा है,

 

उन्होंने ने जवाब दिया की यह बहुत ज्यादा काम कर रही थी, और उसकी वजह  से यह सब हो गया था, लड़के ने कहा की कुछ भी सही लेकिन उसकी तबियत खराब हो रही थी तो आप लोग कहा थे, कोई भी इसका जवाब देने को त्यार नहीं था, उनके पास जवाब होता तो वह देते मगर जब है ही नहीं तो क्या देते, इसलिए लड़के ने एक फैसला लिया था, अगली सुबह ही लड़के ने अपने सामन को लिया और साथ में अपनी पत्नी को भी लेकर जाने लगा तो माता-पिता इस बार जरूर बोले,

 

उन्होंने ने कहा की कहा जा रहे हो लड़के ने जवाब दिया की अगर आपके रहते हुए कोई इतना बीमार हो सकता है की उसके लिए दवाई भी न आये तो आप का साथ किस काम आएगा, इतना तो कोई बहार वाला भी कर देता मगर आप तो यही पर थे फिर भी कुछ नहीं कर पाए थे, मेरे बाद आपकी यह जिम्मेदारी थी अगर में होता तो ऐसा नहीं होने देता मगर आपके होते हुए ऐसा हुआ था,

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दोनों में से कोई कुछ नहीं बोल रहा था, उसके बाद लड़का वहा से चला गया था, जब वह अपने शहर में गया तो शरू में कुछ दिक्क्त तो आती है लेकिन सभी मुसीबत का सामना करते हुए वह आगे बढ़ रहा था, समय बीता मगर लड़के का गुस्सा खत्म नहीं हुआ था, कुछ समय बाद लड़का के यहां पर लड़का हुआ मगर लड़के ने यह बात अपने घर तक भी नहीं जाने दी थी, ऐसा लग रहा था की वह बहुत नाराज है, 

 

उसकी पत्नी ने कहा की हमे एक बार तो उनके पास चलना चाहिए ऐसा करने से शायद उनका भी गुस्सा ठीक हो जाए, मगर लड़का इस बात को मानने को त्यार नहीं था, कोई और था भी नहीं जो उन्हें समझा सके, समय और बीत गया था मगर लड़के ने भी वहा जाने की कोई बात नहीं सोची थी, उसका बेटा बड़ा हो गया था, अब उसकी उम्र भी शादी की हो गयी थी, वह उसके लिए लड़की की तलाश कर रहे थे,

 

मगर अभी बात नहीं बन रही थी तभी उसकी पत्नी ने कहा की लड़के की शादी कर रहे है हमे इसके दादा-दादी को बुलाना चाहिए इस बार लड़के के मन में यह बात आ गयी थी, इसलिए वह उनके पास जाने के लिए तयारी कर रहे थे, उसके बेटे ने भी कभी अपने दादा-दादी नहीं देखे थे, इसलिए वह जाना चाहता था और वह रात की गाडी से घर पहुंच गए थे, जब वह घर पहुंचे तो उसके माता-पिता बहार ही बैठे थे,

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वह बहुत बूढ़े हो गए थे इस बात को आज पचीस साल हो गए थे इतने साल में एक बार भी वह मिलने नहीं आये थे, उनकी आँखे अब बहुत कमजोर हो गयी थी वह उन्हें पहचान पाने में बहुत दिक्क्त दिखा रही थी, जब उनके पोते ने कहा दादा जी तो वह समझ चुके थे की उनका बेटा आया है, उनकी आँखे नम थी अपने जीवन के पचीस साल बाद वह उन्हें देख रहे थे, अब और क्या लिखे कुछ समझ नहीं आ रहा है क्योकि यह बहुत दुःख की बात है इंसान अपनी छोटी-छोटी लड़ाई में अपने कुछ अच्छे पल भी खो देता है, यह जिंदगी इतनी लम्बी नहीं है लेकिन लोग इस बात को नहीं समझते है और जब समझ में आता है तो बहुत देर हो चुकी होती है,

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