राजस्थान का किला, bhoot ki kahani

bhoot ki kahani

राजस्थान का किला, bhoot ki kahani, यह कहानी एक किले की है, अब वह किला अच्छी हालत में नहीं है, जब वह उस किले में गया, तो उसने वहा पर कुछ ऐसा देखा था, जिसके बाद वह कही भी नहीं रुका था, यह कहानी आपको पसंद आएगी,

राजस्थान का किला : bhoot ki kahani

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bhoot ki kahani

राजस्थान का वो किला बहुत डरावना लग रहा था, वहा पर रुकना बहुत ही मुश्किल था, हमने तो वहा से भागने में ही भलाई सोची, जब तक काफी अँधेरा भी हो चुका था, लेकिन कुछ नहीं किया जा सकता था, ये  कैसे शुरू हुआ, अब हम आगे बताते है,  रोहन मेरे साथ ही पढ़ता है, रोहन के गांव में शादी हो रही थी, इसलिए रोहन को भी उसी शादी में बुलाया गया था,  रोहन अकेला जाना चाहता नहीं था, इसलिए उसने मुझे भी चलने के लिए कहा था,

 

पहले तो  सोचा की वहा कोई मुझे जनता भी नहीं है, और फिर जब अपना ही दोस्त कह रहा है, तो जाने में क्या हर्ज है, इसलिए मेने हां कह दी और हम दोनों अपनी ही कार से रोहन के गांव में चल दिए, रास्ता भी बहुत बड़ा था और हमे सुबह पहुंचना था, रात भर कार को नहीं चलाया जा सकता था, इसलिए हम दोनों बारी-बारी से कार चला रहे थे, हम कार को काफी देर से चला कर थक गए थे, इसलिए एक जगह हमने कार को रोक दिया था,   

 

हम दोनों बाहर निकले और कुछ देर  वही खड़े रहे, हमारी नज़र एक खंडर पर गयी, वो शायद पहले एक किला रहा होगा, अब उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब थी, रोहन ने कहा की वहा चलकर देखते है, वैसे भी यहां पर हम रोज नहीं आते है, अब आ ही गए है, तो देख लेते है, मेने काफी मना किया की, अब रात में वहा कुछ भी दिखाई नहीं देगा, लेकिन रोहन मान नहीं रहा था,

 

पता नहीं उसे उस खंडर में क्या दिखेगा, उसने वहा पर जा कर आवाज लगायी और में न चाहते हुए भी वहा पर चला गया, देखने में बहुत ही अजीब लग रहा था, चारो और की दिवार तो लगभग समाप्त ही हो गयी थी, रोहन ने आवाज लगायी की यहां पर कुछ सीढिया है, जो ऊपर की और जा रही थी, अब ऊपर क्या होगा, मना करने पर भी रोहन नहीं माना, मुझे भी ऊपर की और ले गया.

 

ऊपर जाने पर एक कमरा था,  उसमे काफी अँधेरा था, लेकिन वहा से कुछ आवाज आ रही थी, शायद किसी के रोने की, ऐसी ही आवाज कुछ अच्छी नहीं होती है, रोहन ने आवाज लगायी की वहा पर कौन है, पर कोई नहीं बोला, मेने कहा की अब यहां से चलो, पर वो नहीं माना और अंदर गया, तो बाहर तेजी से आया, हम दोनों ही वहा से भागे और अपनी कार के पास पहुंच कर दोनों वहा से निकल गए,

 

बहुत बार पूछने पर रोहन ने बताया, की अंदर एक भूत हवा में  था, उसने मुझे देखा और मुस्कुराया,  तभी वहा से भागने में ही भलाई थी, मेने तो पहले ही कहा था, की रात में ऐसी जगह नहीं जाते, पर तुम नहीं माने, रोहन ने कहा की अब नहीं जाऊँगा, दोस्तों हमारी भी आपसे यही राय की, आप भी ऐसी जगह न जाए, पता नहीं कौन हो वहा पर.

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2 thoughts on “राजस्थान का किला, bhoot ki kahani”

  1. jyoti bisht

    ye khani or v drawni ho skti thi but muje koi dr nhi lga ise sun k

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