एक अनोखी सोच, panchatantra stories in hindi

panchatantra stories in hindi

एक अनोखी सोच की कहानी (panchatantra stories in hindi, story for kids in hindi) आपकी सोच भी बदल सकती है इसलिए यह कहानी आपको बहुत पसंद आएगी, यह कहानी आपको जरूर पढ़नी चाहिए,

एक अनोखी सोच की कहानी : panchatantra stories in hindi

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panchatantra stories in hindi

वह अक्सर अपने घर पर ही रहता था, लेकिन आज उसे कही पर जाना था, उसके मामा के यहां पर  कोई उत्सव मनाया जा रहा था, इसलिए घर से और कोई भी नहीं जा पा रहा था, उसे अकेले ही घर से जाना था, उसके मामा का घर लगभग बीस किलो मीटर की दुरी पर था, जिसका रास्ता जंगल से होकर जाता था, एक और भी रास्ता था मगर वह घूम कर जाता था, उससे जाने पर पूरा दिन लगता था,

 

उस समय में कोई साधन नहीं था, या तो आप घोडा गाडी से जा सकते थे या आपको पैदल ही जाना पड़ता था इसलिए जंगल का रास्ता ही ठीक था, लेकिन वह सुरक्षित बिलकुल भी नहीं था, अगर आप सावधानी से जाते है तो यह आराम से पार किया जा सकता था, लेकिन बहुत ही ध्यान से जाने पर आराम से पहुंच सकते थे, उस लड़के ने अपने साथ थोड़ा खाना जोकि भूख लगने पर वह खा सकता था,

 

अपने घर से वह अगली सुबह ही निकल पड़ा था, वह आराम से दोहपर तक पहुंच सकता था, इसलिए वह घर से चल दिया था, घर से निकले हुए हुए अभी आधा घंटा ही हुआ था, अब जंगल का रास्ता शरू हो जाता है, जंगल में जाने पर थोड़ा डर भी लगता है, लेकिन और कोई भी रास्ता आसान नहीं था, यही रास्ता ठीक लग रहा था, तभी उसकी नज़र कुछ बंदरो पर गयी थी, वह उन्हें देखकर हंस रहा था,

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तभी एक बंदर ने उसके हाथ में रखा हुआ थैला ले लिया था, उसने बहुत कोशिश की मगर वह थैला नहीं ले पा रहा था, तभी उसने एक तरकीब निकाली और उसने एक पेड़ से कुछ फल लिए और एक-एक करके सभी फल नीचे गिरा दिया बंदर नकलची थे इसलिए उन्होंने ने भी वह थैला नीचे  गिरा दिया था, अपना थैला लिया और आगे की और चल दिया था, तभी अचानक ही जंगल का वातावरण खराब हो गया था,

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ऐसा लग रहा था की बहुत तेज बारिश आने वाली है, बारिश भी होने लगी थी, कुछ देर छुपने के लिए जंगल में एक जगह की तलाश कर ली थी, बारिश को देखकर अच्छा लग रहा था मगर जंगल की बहुत ही शांत जगह में जब होती है तो अजीब सा डर लगता है, चारो और बस बारिश की बूंद की आवाज थी, उसे डर भी लग रहा था, ऐसा लगता था की वह यह सोच रहा है की यहां से जल्द ही निकला जाए, पर बारिश रुक जाए तो अच्छा होगा,     

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एक बारिश से होती हुई बिजली एक पेड़ से टकरा गयी थी, और उस पेड़ पर अचानक ही आग लग गयी थी, उसे यह नज़ारा देखकर बहुत डर लग रहा था, वह मन में सोच रहा था की शायद भगवान् की यह लीला बहुत ही डरावनी है, वह कुछ भी नहीं कर सकता था, अगर साथ में कोई होता तो बहुत अच्छा होता लेकिन कोई नहीं है तो डर भी लगता ही है,

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कुछ देर बाद बारिश हल्की हो गयी थी, उसे अब ऐसा लग रहा था की अब यहां से जितनी जल्दी हो सके यहां से निकला जायें, वह जंगल से बहार निकल पड़ा था वह जल्दी-जल्दी जा रहा था, लेकिन जंगल काफी बड़ा था वह उसी पगडण्डी से जा रहा था जिससे सभी लोग आते-जाते है, लेकिन रास्ता तो बहुत लम्बा था वह जल्दी कैसे काट सकता था, तभी उसने सामने एक भालू देखा था,

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भालू को देखकर तो उसे बहुत डर लग रहा था, वह भालू के सामने नहीं जाना चाहत था, वह वही पर छिप गया था, वह बालू का इंतज़ार कर रहा था की जब वह वहा से जाए तो तभी वह वहा से चले मगर यह तो कही पर भी नहीं जा रहा था वह उसे थोड़ा नजदीक से जाकर देखता है, तो भालू के पैर में कुछ लगा हुआ था, जिसके कारण से वह चल नहीं पा रहा था,

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वह डर तो रहा था मगर उसे बहुत दया भी आ रही थी, वह डरते हुए उसके पास गया और उसके पैर में फंसी हुई कांटो की झाडी निकाल दी थी भालू को अब अच्छा महसूस हो रहा था, उसे लगा की इस लड़के ने उसकी मदद की थी, इसलिए भालू ने उसे कुछ नहीं कहा और आगे की और चल दिया था, यह बात सच है की कोई भी जानवर कभी हमला नहीं करता है जब तक उसे यह नहीं लगता है वह उसे नुक्सान पहुंचा रहा है,

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भालू अब वह से चल पड़ा था, लड़का भी आगे की और बढ़ गया था, वह चलता जा रहा था, तभी उसे कुछ हिरन भी दिखाई दिए थे उन्हें देखकर वह बहुत खुश हो गया था, जब उस लड़के ने उन्हें देखा तो उसका डर भी अब कम हो गया था, वह आगे बढ़ता गया और वह जंगल के रास्ते से अब बहार आ चूका था, बहार आकर उसे अच्छा लग रहा था, वह जंगल के खतरों से बहार था,

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अब वह मामा के गावो की और बढ़ने लगा था, उसे आते हुए शाम हो गयी थी, क्योकि उसका बहुत समय खराब हो गया था, और जंगल के रस्ते से चलना थोड़ा मुश्किल भी था, उसने एक भालू की भी मदद की थी, वह अपने जीवन में सभी की मदद करना चाहता था, हमे जीवन में सबकी मदद करनी चाहिए और व्यहि सोचता हुआ वह गांव में आ चूका था, सभी लोग उसे देखकर बहुत खुश भी थे, क्योकि वह पहली बार अपने मामा के यहां पर गया था,

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