सोमवार का दिन हिंदी कहानी, hindi short stories

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hindi short stories, सोमवार का दिन हिंदी कहानी, एक दिन में ऑफिस में काम कर रहा था की अचानक फोन की घंटी बजी और मैंने फोन उठाया और हैलो कहासामने से आवाज आयी की में आपसे मिलना चाहती हू , आप पाँच बजे तक फ्री हो जायँगे, मेने कहा हांमें साढ़े पाँच बजे तक ऑफिस में ही हू. उसने कहा की में पौने पाँच बजे तक आपके पास जाउंगी, शायद ऐसा फली बार हुआ है की कोई लड़की मुझसे मिलने रही पर, में तो उसे जानता भी नहीं हू.

सोमवार का दिन हिंदी कहानी : hindi short stories

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शायद ये पल जीवन में पहली बार रहा है. तो मेने जल्दीजल्दी अपना काम निपटाना शृरू कर दिया, और चपरासी को बुलाया और कुछ पैसे देकर कहा की पांच बजे दो ठन्डे और कुछ बिस्कुट ले आना. ठीक है साहब और चपरासी चला गया. थोड़ी देर बाद शर्मा जी कुछ फाइल लेकर आये और कहा की इन पर साइन कर दीजिये कुछ पैंडिंग बिल भी है और कुछ पेमेंट भी देनी हैमैंने जल्दी जल्दी में सभी पर साइन कर दिए और कहा की कोई और भी काम हो तो वो भी जल्दी बता दो, शर्मा जी बोले नहीं फिलहाल तो यही है बस,  मुझे तो बस इंतज़ार था उस पल का जो पौने पांच बजे पूरा होगा

 

काम के बाद घडी पर नज़र गयी तो साढ़े चार बज गए थे, और मेरी नज़र उस राह पर लग गयी झा से कोई आने वाला है. में नहीं जानता की वो कौन है और कैसी है. पौने पांच बज गए थे और अब समय आने वाला ही था उसके आने का ……..

 

इंतज़ार हो रहा था उस पल का और पांच बज चुके थे बार राह पर कोई था ,अब गुस्सा रहा था की अब तो पांच बज चुके पर कोई नज़र नहीं रहा था उधर चपरासी भी गया, साहब ले आऊ ठंडा, नहीं रुको अभी वो चला गया.

 

सवा पांच बज गए और गुस्सा अपने चरम पर पहुच चूका था. ये कोई मजाक है. हम यह खली बैठे है उसके इंतज़ार मैं पता नहीं कितने ख्याल दिमाग में रहे थे ,देखा की सभी लोग ऑफिस से जा रहे थे और में सोच रहा था की अब इंतज़ार में सारी रात यही बैठा रहु

 

सीढियो पर कुछ आवाजे आने लगी ऐसा लगा की कोई ऊपर रहा है. समय अब साढ़े पांच का हो रहा था,
सॉरी सर में लेट हो गयी उसकी और देखते ही मुझे ऐसा लगा की पूरी दुनिया में शायद ही कोई उस जैसा हो , में तो उसे ही देखता राह गया और गुस्सा तो मानो छूमंतर ही हो गया था

 

मेने उसे बैठने को कहा और ठंडा पिने को कहा और नज़र तो उस चेहरे से हट ही नहीं रही थी. बस ऐसा मन कर रहा था की देखता ही रहु.

 

पुरे ऑफिस में एक ऐसी सुंगध फैली जा रही थी मेरा दिमाग ये जानने की कोशिस कर रहा था की ये कोनसे फूल की खुसबू हो सकती है.     

 

सर में आपसे इसलिए मिलने आयी हू की में एक उपन्यास लिख रही हू में आप जैसे लेखक तो नहीं हू पर कोशिस कर रही हू. की कुछ बेहतर लिख सकू. उसमे आपकी कुछ मदद चाहिए .

 

हां बिलकुल में आपकी पूरी सहायता करूँगा. बाते का कर्म आगे बढ़ता गया और मेरी सोच पर पानी फिर गया , जब उसने कहा की में शादी शुद्धा और एक बच्ची है.शायद में ही गलत ख्याल में डूबा हुआ था. बाते करते करते समय भी बीत गया अब घडी में सात बज रहे थे . शायद समय भी ज्यादा हो गया था. इस पर उसने बोला की अब मुझे चलन चाहिए काफी देर हो गयी है

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मेने कहा की आप कैसे जायँगी आपको बस स्टैंड तक ड्राप कर दू या आप चली जायँगी उसने कहा की में चली जाउंगी, फिर वो बस स्टैंड की और चली गयी और में भी अपनी उदासी लिए अपने घर की और चल दिया…. शायद कुछ पल अपने जीवन में ऐसे आते जो अपनी छाप छोड़ जाते है. और ज़िन्दगी युही चलती रहती है. दोस्तों अगर आपको सोमवार का दिन हिंदी कहानी पसंद आये तो आगे शेयर जरूर करे 

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