गणेश चतुर्थी, ganesh chaturthi festival

ganesh chaturthi festival

गणेश चतुर्थी का त्योहार

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ganesh chaturthi festival

ganesh chaturthi festival, गणेश चतुर्थी का त्योहार हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण है हिंदू धर्म में यह बहुत से रीति रिवाजों और रस्मों के साथ मनाया जाता है जैसे ही यह त्यौहार नजदीक आता है लोग बहुत ही उत्साहित हो जाते हैं

 

गणेश चतुर्थी के त्यौहार में भगवान गणेश की मिट्टी की मूर्ति लोग लाते  हैं और 10 दिन तक उसकी पूजा करते हैं गणेश चतुर्थी का त्योहार दूसरे राज्य में मनाया जाता है जैसे कि महाराष्ट्र कर्नाटक उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत में बड़ी ही उत्साह के साथ मनाते हैं

 

गणेश चतुर्थी का त्योहार तराई क्षेत्रों में भी मनाया जाता है नेपाल, सिंगापुर, मलेशिया, न्यूजीलैंड आदि देशो में भी मनाया जाता है इस त्यौहार के पीछे भी एक कहानी है जब एक बार भगवान शिवजी पहाड़ी में समाधि लेने के लिए चले गए तो पार्वती वही पर अकेली थी और उन्होंने चंदन के निर्माण से गणेश जी को अपना बेटा बनाने का निश्चय किया

 

चंदन के लेप द्वारा बनाई गई मूर्ति में जीवन दान डाल दिया जिसे यह गणेश जी का जन्म हुआ उसके बाद पार्वती ने कहा कि तुम प्रवेश द्वार पर ही रहो किसी को भी अंदर आने की अनुमति नहीं है और यह कहकर पार्वती अंदर चली गई

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भगवान शिव समाधि से वापिस आए तो उन्होंने एक लड़का खड़ा हुआ देखा भगवान शिव अंदर जाने का प्रयत्न करने लगे तभी उस लड़के ने अंदर जाने से मना कर दिया और कहा कि जब तक माता की आज्ञा नहीं होगी तब तक आप अंदर नहीं जा सकते

 

भगवान शिव के अनुरोध करने पर भी उस लड़के ने अंदर जाने की अनुमति बिल्कुल भी नहीं दी भगवान शिव ने कहा कि मैं तुम्हारा पिता हूं मुझे अंदर आना चाहिए प्रभु गणेश जी ने कहा कि जब तक माता की आज्ञा नहीं है तब तक आप अंदर नहीं आ सकते

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इस बात को सुनकर भगवान शिव को क्रोध आया और उन्होंने देवताओं से कहा कि उन्हें आज्ञा का पालन करना सिखाये जिससे कि वह सब की आज्ञा माने फिर इंद्र भगवान ने भी उन्हें समझाना चाहा लेकिन गणेश जी बिल्कुल नहीं समझ रहे थे और इंद्र भगवान उन से हार गए और वापस चले गए

 

भगवान शिव दुबारा से आए हैं उस लड़के को वहीं पर खड़ा देखा और गुस्से में आ गया और उन्होंने अपना त्रिशूल गणेश जी को सिर काटने को छोड़ दिया और गणेश जी का त्रिशूल लग गया और माताजी अंदर से आयी और उन्होंने देखा कि बच्चा नीचे गिरा हुआ है तब उन्होंने अपना रोना शुरु कर दिया और कहा कि अगर मुझे मेरा बच्चा वापस नहीं मिला तो मैं पूरे संसार को नष्ट कर दूंगी

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जब भगवान शिव ने कहा कि यह दोबारा सिर जोड़ना तो संभव नहीं लेकिन अगर किसी और का सिर हम लगाना है चाहे तो लगा सकते हैं बहुत ढूंढने पर उन्हें हाथी का सिर मिला और हाथी का सिर उन्होंने गणेश जी पर लगा दिया सभी देवी देवताओं ने गणेश जी को आशीर्वाद दिया

 

 और कहा कि सबसे पहले घर में पूजा होने से पहले गणेश जी की पूजा की जायेगी और ज्ञान और धन पाने के लिए गणेश जी की पूजा अनिवार्य हो गई तभी से गणेश जी की पूजा पहले होती है और गणेश जी की पूजा के बाद ही अन्य पूजा होती है

 

गणेश चतुर्थी के त्योहार को कैसे मनाते हैं

 

 गणेश चतुर्थी के उत्सव को मनाने के लिए पहले से ही तैयारियां शुरू कर देते हैं बहुत ही कलात्मक तरीके से मिट्टी की मूर्तियां बनाई जाती है और फिर मिट्टी की मूर्ति बनाने के बाद गणेश जी की पूजा शुरु कर दी जाती है

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ganesh chaturthi festival, गणेश जी की पूजा करने के लिए सभी लोग नहा कर मंदिर जाते हैं और उनकी पूजा करते हैं भगवान गणेश की मूर्ति में भगवान को बुलाने के लिए मंत्र का जाप किया जाता है और बहुत सारे फलों जैसे नारियल की मिठाई आदि धूप देकर भगवान गणेश जी को भेंट करते हैं 10 दिन तक पूजा चलती रहती है 11 दिन गणेश जी का विसर्जन करते हैं और नाच गाने के साथ जुलूस के माध्यम से यह क्रिया पूरी की जाती है अगर आपको यह जानकारी पसंद आई है तो आगे भी शेयर करें और कमेंट करके हमें भी बताएं.

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