पैसों का मूल्य हिंदी कहानी, Value hindi story

Value hindi story | Hindi kahani

Value hindi story, यह  बहुत ही  पुरानी बात है. एक नगर में सुखदेव नाम का एक अमीर साहूकार रहता था. उसकी दो संतान थी, एक बेटा और बेटी. साहूकार की बेटी उसके बेटे से बड़ी थी. उसके अन्दर एक अच्छी लड़की के सभी संस्कार थे, परन्तु उसका बेटा दोस्तों की बुरी संगति में रहकर बिगड़ गया था. वह अपने पिता के पैसे अपने दोस्तों के साथ गलत कामो में लगाता था.

पैसों का मूल्य हिंदी कहानी :- Value hindi story

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Value hindi story, सुखदेव ने सोचा कि शायद अभी वह छोटा हैं, उसे गलत सही की समझ नहीं है, परन्तु वक़्त के साथ वह जैसे जैसे बड़ा होगा सुधर जायेगा. समय बीतता गया और उन्होंने अपनी पुत्री की शादी करा दी. उनकी बेटी अपने ससुराल में खुश थी. अब उनका बेटा भी बड़ा हो चूका था, परन्तु दोस्तों के साथ मिलकर गलत कामो में पैसा बर्बाद करने की बुरी आदत अभी भी उसकी ख़त्म नहीं हुई थी. बचपन के प्यार ने अब उसे पूरी तरह बिगाड़ दिया था. अपने बेटे द्वारा अपनी मेहनत से कमाये हुए धन को यूँ बर्बाद होते देख सुखदेव को बहुत चिन्ता हुई. अब उन्होंने मन ही मन अपने बेटे को सुधारने की सोची.

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अगले दिन सुखदेव ने अपने बेटे को अपने पास बुलाया और कहा, अब तुम बड़े हो गए हो, इसलिए अब तुम्हे रोज एक रुपया कमा के लाना हैं. अगर तुम एक रुपया कमा के लाओगे तभी तुम्हे शाम को भोजन दिया जायेगा. पिता की बात सुनकर बेटे को रोना आया. अपने बेटे को रोते देख उसकी माँ का दिल पिघल गया और उन्होंने उसे चोरी से एक रुपया दे दिया. शाम को पिता के यह पूछने पर कि क्या कमा के लाये हो, तब उसने माँ का दिया रुपया दिखा दिया. रुपया देखकर सुखदेव सिन्हा ने अपने बेटे से कहा, जाओ इस रूपये को घर के पास वाले कुँए में फेक आओ. पिता की बात सुनकर उसने बिना कुछ कहे रुपया जाकर घर के पास वाले कुँए में फेक दिया.

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उसे किसी प्रकार का कोई दुःख नहीं हुआ, यह देखकर सुखदेव को कुछ अजीव लगा. उन्होंने अपनी पत्नी को कुछ दिनों के लिए भेज दिया.दूसरे दिन फिर यही हुआ उसने अपने अपनी बहन जो की अपने ससुराल से घर आयी हुई थी, उससे रुपया माँग कर अपने पिता को दिखा दिया, और उनके कहने पर बिना किसी झिझक के पुनः घर के पास वाले कुँए में डाल दिया. अब पुनः सुखदेव को कुछ अजीब लगा, उन्होंने अपनी बेटी को अपने ससुराल भेज दिया. अगले दिन राजू बहुत परेशान था, Because आज उसकी मदद करने वाला कोई नहीं था. उसे शाम के खाने की चिन्ता हो रही थी. उसने अपने दोस्तों से पैसे माँगने की बहुत कोशिश की परन्तु उसके किसी भी दोस्त ने उसकी मदद नहीं की.

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राजू घर से बाहर भरी गर्मी में कोई काम तलाशने लगा. थोड़ी देर बाद उसे बोझा ढोने का एक काम मिल गया. उसने तीन चार घण्टे बोझा ढोया तब जाकर उसे एक रुपया मिला. शाम को वह पसीने से भीगा हुआ अपने घर गया. घर जाते ही उसके पिता ने उससे पूछा, आज लाये एक रुपया कमा के. उसने रुपया अपनी जेब से निकाला और अपने पिता की ओर बढ़ा दिया.सुखदेव ने उस रूपये को बेटे को वापिस करते हुए पुनः उसे घर के पास वाले कुँए में फेकने को कहा. रुपया फेकने पर उसने कहा, पिताजी, मैं इस रूपये को नहीं फेक सकता. आप नहीं जानते इस एक रूपये को कमाने के लिए आज मैने अपना कितना पसीना बहाया हैं.

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अपने बेटे के ऐसे वचन सुनकर सुखदेव ने उसे अपने पास बुलाया, और कहा, बेटा तुम भी मेरी मेहनत की कमाई को ऐसे ही व्यर्थ के कामो में लगाते हो. आज जिस तरह तुमने अपना पसीना बहा कर यह एक रुपया कमाया हैं, ऐसे मैं भी रोज अपना पसीना बहा कर अपने और परिवार के लिए पैसे कमाता हूँ. सोचो अपनी मेहनत की कमाई को बर्बाद होता देख मुझे कितना दुःख होता होगा. पिता की बात सुनकर उसे बहुत दुःख हुआ, और उसने अपने पिता से पैसे को कभी व्यर्थ के कामो में ना लगाने का वादा किया. सुखदेव बहुत खुश हुआ कि उसके बेटे को अब मेहनत के रूपये की कीमत पता चल गयी है. हमे सदा ही कमाए हुए पेसो की कीमत को पहचानना चाहिए. Value hindi story, Hindi kahani, अगर आपको यह कहानी पसंद आयी है तो आप शेयर कर सकते है 

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