कहानियां रिश्तों की कीमत, stories in hindi

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कहानियां रिश्तों की कीमत

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बहुत दिन बीत गए थे, जब इस शहर में आये तो हम बहुत कुछ पीछे छोड़ आये थे, अब उन सबकी याद आती है मगर हम अब उनसे उतनी दूर है, की अब वहा पर जाने के लिए सोचना पड़ता है, जब कोई नहीं होता है तो सबकी याद आती है, लेकिन अब यादे के सिवाए कुछ भी नहीं हो सकता था, ऐसा सोचते हुए जब रूपा की आँखे लग गयी तो दरवाजे पर दस्तक हुई थी,

 

दरवाजे पर दस्तक के बाद रूपा की आँखे खुली तो उनके सामने उसकी पुरानी सहेली पंखी थी, अरे पंखी तुम यहां पर कैसे, ऐसा कहंते हुए हुए रूपा उसे अंदर लले आयी और दोनों के बीच में बाते शुरू हो गयी थी, आज बहुत साल बाद दोनों सहेली मिली थी, रूपा इस शहर में एकदम अजनबी थी, क्योकि उसके पति की जॉब यहां पर थी, सो उसे यही पर आना भी था, रूपा एक लड़का जो बहुत ही शरारत करता था, अभी वो स्कूल गया हुआ था,

तभी तो घर में शांति थी, जब भी वह आता था, तभी कुछ-न-कुछ करता ही रहता था, उसके होने पर पता ही नहीं चलता है की वक्त कहा गया था, पंखी ने पूछा की तुम यहां पर कब से हो, रूपा ने कहा की हमे यहां पर एक साल हो गया है, और तुम बताओ की आज यहां पर कैसे, पंखी ने कहा की हम यहां पर दो दिन पहले ही आये है, और अब से यही पर रहेंगे, ऐसा सुनकर रूपा को बहुत अच्छा लगा था, कोई तो है जो आज मेरे साथ यहां पर रहने आया है,   

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आज दोनों सहेली आपस में बात कर रही थी, बातें करते हुए जब दोपहर हुई तो रूपा का लड़का भी अब स्कूल से आ गया था, जब लड़के ने देखा की कोई उनके यहां पर आया है, तो वह बहुत खुश हो गया था, कुछ देर तो वह चुप बैठा रहा था, पंखी ने पूछा कैसे हो बेटा, लड़का अभी थोड़ा शर्मा रहा था, रूपा ने कहा की कुछ देर तक ऐसा ही करता है बाद में अपनी शैतानी पर खड़ा हो जाता है,

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रूपा अंदर चली गयी और चाये बनाकर ले आयी और कुछ देर तक बातें चलती रही थी, पंखी ने कहा की अब तो हम दोनों हमेशा मिला करेंगे, मुझे तो तुम्हारा पता बहुत मुश्किल से मिला था, रूपा ने कहा चलो अब तो यही है और आना जाना भी रहेगा, मुझे तो ऐसा लगता था की यहां पर मन कैसे लगेगा, क्योकि कोई तो हो जो हमारे पास आये, 

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पंखी ने कहा की तुम्हारे पति कब तक आते है, रूपा ने कहा की वो ही समय हो जाता है जब रात होने को होती है, पूरा दिन अपने लड़के के साथ बीत जाता है, नहीं तो यहां पर रहना बहुत मुश्किल था, पंखी और रूपा की बात यही बताती है की जब आप अपनों से दूर चले जाते है तो हमे केसा लगता है, हम जब तक पास में होते है तो हमे अपने रिश्तो की कभर नहीं होती है लेकिन जब आप दूर होते है तो आपको सही कीमत का पता चलता है, इसलिए हमेशा अपनों के साथ रहे और खुश रहे,

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