kauwa ki kahani and kauwa aur chidiya ki new kahani- कौवा की दो नयी कहानी

kauwa ki kahani and kauwa aur chidiya ki new kahani

कौवा की नयी कहानी (kauwa ki kahani) जिसमे एक कौवा उस घर में रह रही बुढ़िया को बहुत परेशान करता है वह kauwa हर रोज उसके पास आता है और वही पर बैठ जाता है जब तक वह बुढ़िया कुछ खाने को नहीं बना लेती है तब तक वह kauwa वही पर इंतज़ार करता है जब वह बुढ़िया खाना बना लेती है तब वह कौवा आता है और अपने लिए थोड़ा खाना ले जाता है इस बात से वह बुढ़िया बहुत परेशान रहती है

कौवा की दो नयी कहानी : kauwa ki kahani

kauwa ki kahani

kauwa ki kahani

एक दिन बुढ़िया खाना बना रही थी तभी उसे याद आया की वह कौवा (kauwa) आ चूका है मगर इस बार कुछ ऐसा सोचना था जिससे वह कौवा (kauwa) यहां पर न आये मगर कुछ भी समझ नहीं आ रहा था क्योकि वह कौवा (kauwa) एक पेड़ पर बैठा था जब भी खाना बनता था बुढ़िया उसे हर बार वहा से भगाने की कोशिश करती थी मगर कौवा पीछे ही पड़ जाता था वह कुछ नहीं कर सकती थी एक दिन बुढ़िया खाना बना रही थी मगर बार बार उसे ही देख रही थी जब खाना बन चूका था तब वह कौवा (kauwa) आता है

 

तभी वह बुढ़िया एक टोकरी लेती है उसे उस कौवा को पकड़ लेती है अब वह कौवा वही पर फंस जाता है बुढ़िया कहती है की अब तुम्हे पता चल जाएगा की कितनी परेशानी से में खाना बनाती हु और तुम्हे वह ऐसे ही मिल जाता है आज बुढ़िया को बहुत ख़ुशी थी क्योकि आज वह कौवा पकड़ा गया था वह बुढ़िया अंदर जाती है, कुछ देर बाद ही बुढ़िया जब बाहर आती है तो देखती है की यह कौवा तो अपने कुछ और साथी को भी अपने साथ ले आया है वह सभी घर के बाहर है

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बुढ़िया फिर से अंदर जाती है और सोचती है की यह कौवा तो यहां पर सभी को ले आया है और वह कुछ समय बाद ही टोकरी से बाहर भी आ जाएगा यह अच्छी बात नहीं है मगर वह बाहर नहीं जा सकती थी क्योकि सभी कौवा बाहर ही थे शाम हो गयी थी मगर कोई भी कौवा वहा से नहीं गया था बुढ़िया आती है और उन्हें भगाने की कोशिश करती है मगर कोई नहीं जाता है बल्कि वह बुढ़िया पर हमला कर देते है बुढ़िया फिर से अंदर चली जाती है यह तो समस्या हो गई थी

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बुढ़िया अपनी खिड़की से देखती है और वह कौवा भी बाहर आ गया था जिसे बुढ़िया ने पकड़ा था आज मुसीबत कम नहीं थी बल्कि बहुत ज्यादा बढ़ गयी थी यह एक कौवा भारी पड़ गया था लेकिन कुछ समय बाद ही वह सभी कौवे जा चुके थे यह देखकर भुड़िया को बहुत ख़ुशी थी जब वह बाहर आती है तो कोई भी कोवा नज़र नहीं आता है, वह शाम का खाना बनाती है और जब खाना बन जाता है तो सभी कौवे फिर से आ जाते है

kauwa ki kahani –

बुढ़िया घर के अंदर जाती है और खाना बाहर ही रह जाता है बुढ़िया को समझ आता है की अगर वह एक ही कौवा (kauwa) को खाना देती रहती तो वह इस मुसीबत में न पड़ती क्योकि अब तो बहुत अधिक कौवे आ चुके थे अब वह इन सभी कौवे का कुछ नहीं कर सकती थी अगर आपको यह kauwa ki kahani पसंद आयी है तो शेयर जरूर करे 

 

कौवा और चिड़िया की दूसरी कहानी : kauwa aur chidiya ki new kahani

यह कहानी कौवे और चिड़िया (kauwa aur chidiya ki kahani) की है इस कहानी में वह कौवा और चिड़िया (kauwa aur chidiya) दोनों बहुत अच्छे दोस्त है वह दोनों ही एक साथ में रहते है जबकि यह बात कौवा जानता है की सभी कौवे (kauwa) मुझे पसंद नहीं करते है क्योकि में उस चिड़िया (chidiya) के साथ में रहता हु एक दिन की बात है चिड़िया ने कहा की मुझे कुछ दिन के लिए अपने रिश्तेदार के यहां पर जाना है इसलिए तुम्हे भी मेरे साथ में चलना होगा

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वह कौवा (kauwa) कहता है की में उस जगह पर क्या कर सकता हु मगर चिड़िया की जिद्द की वजह से वह चिड़िया के साथ चला गया था जब दोनों पहुंचे तो चिड़िया (chidiya) के सभी रिश्तेदार डर गए थे क्योकि उन्हें नहीं पता था की यह कौवा भी साथ में आया है, सभी ने चिड़िया को बहुत समझाया था क्योकि यह अच्छी बात नहीं है की एक कौवा हमारे साथ में रहे जबकि यह किसी का भी साथ नहीं देते है कोई भी इन्हे पसंद नहीं करता है

 

यह बात सुनकर चिड़िया (chidiya) कहती है की यह बहुत अच्छा है हम दोनों बहुत समय से साथ में रह रहे है, मुझे पता है की यह अच्छा है अगर आप को यह पसंद नहीं है तो हम दोनों यहां से चले जाते है मगर सभी ने कहा की अगर तुम ऐसा सोचती हो तो बहुत अच्छा है वह दोनों वही पर रुक जाते है कौवे (kauwa) को भी बहुत अच्छा लग रहा था, कुछ समय के बाद वह वापिस जाने लगते है मगर ठंड अधिक होने की वजह से वह अधिक दूर तक नहीं उड़ पाते है उन्हें एक पेड़ नज़र आता है

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वह उस पर बैठ जाते है मगर उस पेड़ पर पत्ते न होने की वजह से ठंड बहुत अधिक लग रही थी रात का समय था जब तक धुप नहीं आती है तब तक उन्हें वही पर रहना था चिड़िया (chidiya)को बहुत अधिक ठंड लग रही थी यह देखकर कौवा चिड़िया को बचाता है जिससे उसे अधिक ठंड न लगे सुबह हो जाती है चिड़िया को अब ठंड नहीं लग रही थी क्योकि उस कौवे (kauwa) ने अपने पंख से चिड़िया को छुपाया हुआ था चिड़िया कहती है की अब कुछ देर बाद धूप निकलने वाली है

kauwa aur chidiya ki new kahani

उसके बाद हम दोनों घर पहुंच जायँगे मगर वह कौवा (kauwa) कुछ नहीं बोल रहा था रात की ठंड ने शायद उस कौवे को चुप कर दिया था मगर चिड़िया (chidiya) बच गयी थी आज चिड़िया को अहसास हुआ था की उसका दोस्त अब उसके साथ में नहीं है यह बहुत दुःख की बात है उसने चिड़िया को बचाने के लिए उस ठंड का सामना किया था जिससे वह चिड़िया बच गयी थी अगर आपको यह kauwa aur chidiya ki new kahani पसंद आयी है तो शेयर जरूर करे 

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