रामनाथ की साइकिल हिंदी कहानी, story in hindi

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रामनाथ की साइकिल हिंदी कहानी 

story in hindi, hindi story, kids story in hindi, हार मत मानो हमेशा अगला मौका जरूर आता है यह बात हम सभी ने अपनों से बड़ों से ही बात सुनी होगी कि हमें जीवन में कभी भी हार नहीं माननी चाहिए और सीखने की तो कोई उम्र नहीं होती जब हमारा मन करें हमें कुछ ना कुछ नया सीखना चाहिए क्योंकि सीखने से हमारा ज्ञान और बढ़ता है



एक गांव में एक आदमी रहता था जिसका नाम रामनाथ था रामनाथ अपनी पत्नी के साथ छोटे से गांव में रहता था और और गांव से थोड़ी दूर पर एक स्कूल में पढ़ाने जाताl एक दिन  चुपचाप बैठा था तो वह सोचने लगा जब मैं किसी को साइकिल की सवारी करते देख,  हारमोनियम बजाते देखता हूं तो मुझे अपने ऊपर बहुत दया आती है




सोचता हूं भगवान यह दोनों ही चीजें आपने खूब बनाई है एक तो समय बचाती है और दूसरी से समय कटता है पर मुझे इन दोनों में से कुछ भी नहीं आता हम ना साइकिल चला सकते हैं और ना ही बाजा बजा सकते हैं रामनाथ ने सोचा चलो क्यों ना मैं साइकिल चलाना सीख लूं अगले दिन रामनाथ अपने फटे पुराने कपड़े ढूंढने लगा और अपनी पत्नी से कहा कि जरा इन की मरम्मत कर दो उसकी पत्नी बोली पहले आप बताओ कि इनका क्या बनेगा

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रामनाथ  बोला मैं तुम्हें बता तो दूं पर तुम किसी को मत बताना कि हम साइकिल सीखना चाहते हैं रामनाथ उसकी पत्नी ने कहा क्यों रामनाथ बोला कि रोज रोज स्कूल टांगे से जाना पड़ता है और तांगे का खर्च बहुत होता है साइकिल चलाना सीख जाएंगे तो उसका खर्च भी बच जाएगा

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उसकी पत्नी ने कहा पर आपकी उम्र साइकिल चलाने की नहीं है आप तो बूढ़े हो चुके हो पर कोई बात नहीं आप एक बार कोशिश करके देख लो आप रामनाथ बाजार से एक दवाई का डिब्बा भी ले आया जिससे अगर उसे चोट लगे तो वह उस पर लगा लें और एक खुला मैदान भी ढूंढ लिया जिसमें वह साइकिल चलाना सीखें जा.

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अब उसके सामने एक सवाल आया है कि उसे साइकिल कौन चलाना सिखाया क्योंकि बिना सिखाए तो कुछ भी नहीं आता है रामनाथ यही सोच रहा था कि उसका दोस्त तिवारी वहां आया तिवारी बोला क्यों रामनाथ कैसे चुपचाप बैठे हो रामनाथ मैं उसे सारी बात बताई थी तिवारी ने कहा एक है तो पर वह पैसे लेगा रामनाथ ने कहा कितने तिवारी बोला सब से 25 देता है

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एक महीने के तुमसे 20 ले लेगा क्योंकि मैं उसे जानता हूं इसलिए राम नाथ बोला कितने दिन में सिखाएगा तिवारी बोला था पूछना पड़ेगा राम सोचने लगा अगर मुझे साइकिल चलानी आ जाए तो मैं भी साइकिल चलाना सिखाने का ट्यूशन खोल दूंगा

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 मेरे पास ही बहुत बच्चे आएंगे एक बच्चे से 20 लूंगा तो महीने के काफी रुपए आएंगे और यह तो सबसे अच्छा काम हो जाएगा राम  अपने पत्नी को यह बात बताई कि हमें एक गुरुजी साइकिल चलाना सीख आएंगे और हम कल सुबह साइकिल चलाने जाएंगे शाम को तिवारी जी उस साइकिल सिखाने वाले को ले आए

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उसने कहा मैं पहले फीस लूंगा राम नाथ बोल मैं बाद में भी दे दूंगा हां मैं कहीं भागा नहीं जा रहा पर साइकिल चलाने वाला बोला नहीं मैं पहले लेता हूं मुझे किसी का भरोसा नहीं रामनाथ बोला अगर मुझे साइकिल नहीं चलानी आएगी तो क्या तुम मेरे पैसे वापस दो दोगे वह बोला हां दे दूंगा

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रामनाथ बोला तो ठीक है कल सुबह पास के बगीचे में हम साइकिल चलाना सीखेंगे साइकिल चलाने वाले ने कहा क्यों रामनाथ ने कहा वहां पर हरी घास है जिससे हमें चोट भी कम लगेगी सुबह हो गई तो दिन निकल आया जल्दी से जाकर रामनाथ पुराने कपड़े पहन लिए और दवाई का डिब्बा भी हाथ में ले लिया और अपने नौकर को भेजकर मिस्त्री के यहां से साइकिल भी  मंगवा ली और हम बगीचे की तरफ चलने लगे कि बिल्ली रास्ता काट गई और एक लड़के ने छींक दिया अब क्या था

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रामनाथ को इतना गुस्सा आया उस बिल्ली पर और उस शैतान लड़के पर मगर क्या करते दांत पीस कर ही रह गए एक बार फिर भगवान का नाम लिया और आगे बढ़े पर बाजार में पहुंचकर देखा कि हर आदमी जो हमारी तरफ देखता है मुस्कुरा रहा था फिर हमने अपने तरफ देखा तो वह जल्दबाजी में उल्टे कपड़े पहन आया था

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वह वापस घर चला गया दूसरे दिन फिर निकले रास्ते में उस्ताद साहब बोले में एक ग्लास लस्सी पी लूं तुम जरा साइकिल को थामा उस्ताद साहब लस्सी पीने लगे और राम  ने जैसे ही साइकिल था में मानव साइकिल उसके ऊपर चली जा रही थी उसे समझ नहीं रही थी और धीरे धीरे उसके पैर पर गिर गई उसके पैर पर साइकिल बहुत तेज गिरी वह चिल्लाया उस्ताद दौड़ कर आया और आस पड़ोस के लोगों ने उसके पैर से साइकिल भी उठा ले चोट तो नहीं आई पर थोड़े से पैर में खून निकल आया

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दूसरे दिन भी साइकिल नहीं सीख पाई मगर रामनाथ हार मानने वालों में से नहीं था वह तीसरे चौथे पांचवें दिन उसने कपड़े फट वाए हाथ पैर पर चोट खाई लेकिन उसे साइकिल चलानी आ गई अब वह साइकिल में पूरा मास्टर तो नहीं बन गया पर उसने साइकिल चलाने की थोड़ी बहुत ट्रेनिंग जरूर ले ली

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उस्ताद ने रामनाथ को साइकिल पर चढ़ा दिया और सड़क पर छोड़ दिया और कहा अब तुम सीख गए साइकिल रामनाथ चला रहा था और दिल ही दिल में फूला नहीं समा रहा था क्योंकि वह साइकिल चलाना सीख गया था अब उसके सामने जो कोई भी बच्चा, आदमी आता वह जो जो से चलाता हट जाओ हट जाओ और अगर कोई गाड़ी आ जाती तो उसके प्राण ही सूख जाते हैं और भगवान को याद करता जब गाड़ी आराम से निकल जाती तभी उसकी जान में जान आती

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 एक दिन वह साइकिल लिए सड़क पर जा रहा था कि उसे तिवारी आते हुए दिखाई दिया उसने तिवारी जी से दूर से चिल्लाया हट जाओ हट जाओ तिवारी जी ने कहा तुम साइकिल से उतर जाओ पर रामनाथ भी माना हो साइकिल आगे बढ़ाता क्या आगे एक तांगे वाला आ रहा था उसने  तांगेवाले को कहा साइड से निकाल लो तांगे वाले ने साइड से निकालने की कोशिश की पर उसके एक पैर साइकिल में मार दिया

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रामनाथ सड़क पर गिर गए उनके पैरों में खूब चोट लगी और जब उन्होंने आंखें खोली तो वह अपने घर पढ़े थे उन्हें पता ही नहीं था कि उनके शरीर पर कितनी पट्टियां बंद ही हैं जब होश आया तो उनकी पत्नी ने कहा क्यों अब क्या हाल है मैं कहती थी ना बुढ़ापे में साइकिल मत सीखो उस समय तो तुम किसी की नहीं सुनते थे

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story in hindi, hindi story, kids story in hindi, रामनाथ ने सोचा सारा इल्जाम तिवारी पर लगा देता हूं मैं बच जाऊंगा उसने मुस्कुराकर कहा कि तिवारी ही हमें आवाज मार रहा था जिससे हम आगे नहीं देख पर उसकी पत्नी हंस कर बोली थी मैं सब जानती हूं क्योंकि उस टांगे में मैं ही बच्चों के साथ घूमने निकली थी और सोचा था तुम्हें भी साइकिल चलाते देख आऊंगी रामनाथ शरम के मारे नीचे मुंह कर लिया उस दिन के बाद उसने कभी भी साइकिल चलानी नहीं सीखी.

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