डायन से छूटा पीछा, real story in hindi

Real story in hindi

डायन से छूटा पीछा

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bhut ki story, ये कहानी एक ऐसी डायन की है, जिसको एक व्यक्ति से प्यार हो गया और वो उसके पीछे हो पड़ गयी. अब आगे हम ये देखते है की किस तरह से उस आदमी ने उस डायन से कैसे पीछा छुड़ाया. यह कहानी है एक डायन की जो एक व्यक्ति के पीछे ही पड़ गई थी.





और ये डायन उस व्यक्ति से बहुत कुछ दिल की बातें करती थी. इस डायन का तो यहाँ तक कहना था कि उसको उस व्यक्ति से प्यार हो गया है और वह सदा के लिए उसका बनकर रहना चाहती है. पर क्या वह डायन उस व्यक्ति को अपना बना पाई. शायद यह कहानी इस रहस्य पर से परदा उठाएगी और एक डायन के प्रेम को, उसकी चाहत को बयाँ करेगी.




हाँ पर इतना ही नहीं, मैं बता दूँ कि यह कहानी मैंने उस व्यक्ति से सुनी है जिसके पीछे वह डायन पड़ गई थी हाँ मतलब प्यार में. एक दिन जब मैं उस व्यक्ति के पास बैठा, भूत प्रेतों के बारे में जानने के लिए बहुत ही उत्सुक था तो उस व्यक्ति ने यह कहानी सुनाई.

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आप भी सुनिए और आनंद लीजिए. डरना मना है. यह कहानी आज से 45-55 साल पहले की है जब गाँवों के अगल बगल में बहुत सारे पेड़ पौधे, झाड़ियाँ आदि हुआ करती थीं. जगह जगह पर बाँस का बगीचा, महुआ का बगीचा, आम आदि पेड़ों के बगीचे आदि हुआ करती थीं. गाँव के बाहर निकलने के लिए कच्ची पगडंडियाँ थीं वह भी मूँज आदि पौधों से घिरी हुई.

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यह कहानी जिस समय की है उस समय सुनहरी बाबा जवान थे. चिक्का, कबड्डी, दौड़ आदि में बड़ चढ़ कर हिस्सा लेते थे और हमेशा बाजी मारते थे. अरे भाई कबड्डी खेलते समय अगर तीन चार लोग भी उन्हें पकड़ लेते थे तो सबको खींचते हुए बिना साँस तोड़े सुनहरी बाबा लाइन छू लेते थे. सुनहरी बाबा के घर के आगे लगभग 300 मीटर की दूरी पर उनका खुद का एक आम का बगीचा था जिसमें आम के लगभग 14-16 पेड़ थे और इस बगीचे के एक कोने में बसवाड़ी भी थी जिसमें बाँस की तीन चार कोठियाँ थीं.

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आम का मौसम था और इस बगीचे के हर पेड़ की डालियाँ आम से लदकर झुल रही थीं. दिन में सुनहरी बाबा के घर का कोई व्यक्ति दिनभर इन आमों की रखवाली करता था पर रात को रखवाली करने का जिम्मा सुनहरी बाबा का ही था. रात होते ही सुनहरी बाबा खाने के बाद अपना बिस्तर और बँस खटिया उठाते थे और सोने के लिए इस आम के बगीचे में चले जाते थे.

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एक रात सुनहरी बाबा बगीचे में अपनी बँसखटिया पर सोए हुए थे. तभी उनको बँसवाड़ी के तरफ कुछ आहट सुनाई दी. सुनहरी बाबा तो जग गए पर खाट पर पड़े पड़े ही अपनी नजर बँसवाड़ी की तरफ घुमा दिए. उनको बँसवाड़ी के कुछ बाँस हिलते हुए नजर आ रहे थे पर हवा न बहने की वजह से उनको लगा कि कोई जानवर बाँसों में घुसकर अपने शरीर को रगड़ रहा होगा और शायद इसकी वजह से ये बाँस हिल रहे हैं.

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इसके बाद सुनहरी बाबा उठकर खाट पर ही बैठ गए और अपनी लाठी संभाल लिए. अभी सुनहरी बाबा कुछ बोलें इसके पहले ही उन्हें बँसवाड़ी में से एक औरत निकलती हुई दिखाई दी. उस औरत को देखते ही सुनहरी बाबा की साँसे तेज हो गई और वे लगे सोचने की इतनी रात को कोई औरत इस बँसवाड़ी में क्या कर रही है. जरूर कुछ गड़बड़ है. अभी वे कुछ सोंच ही रहे थे कि वह औरत उनके पास आकर कुछ दूरी पर खड़ी हो गई. सुनहरी बाबा तो हक्का बक्का थे. उनके मुँह से आवाज भी नहीं निकल रही थी पर कैसे भी हिम्मत करके उन्होंने पूछा कि तुम कौन हो और इतनी रात को यहाँ क्यों आई हो.

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सुनहरी बाबा की बात सुनकर वह औरत बहुत जोर से डरावनी हँसी हँसी और बोली औरत हूँ और इसी बँसबाड़ी में रहती हूँ. बहुत दिनों से मैं तुमको यहाँ सोते हुए देख रही हूँ और धीरे धीरे मुझे अब तुमसे प्यार हो गया है. मैं सदा तुम्हारी होकर रहना चाहती हूँ. सुनहरी बाबा को अब यह समझते देर नहीं लगी कि यह तो वही डायन है जिसके बारे में लोग बताते हैं कि इस बगीचे में बहुत साल पहले घुमक्कड़ मदारी परिवार आकर लगभग तीन चार महीने रहा था और एक दिन कुछ लोंगो ने उस मदारी परिवार की एक 11-12 साल की बालिका को इसी बसवाड़ी में मरे पाया था और मदारी परिवार वहाँ से अपना बोरिया बिस्तर लेकर नदारद था

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सुनहरी बाबा अब धीरे धीरे अपने डर पर काबू पा चुके थे और उस डायन से बोले कि तुम ठहरी मरी हुई आत्मा और मैं जीता जागता. तुम बताओ मैं तुमको कैसे अपना सकता हूँ. सुनहरी बाबा की बात सुनकर वह डायन थोड़ा गुस्से में बोली कि मैं कुछ नहीं जानती अगर तुम मुझे ठुकराओगे तो मैं तुम्हें मार डालूँगी. अब सुनहरी बाबा कुछ बोले तो नहीं पर धीरे धीरे हनुमान चालीसा पढ़ने लगे. वह डायन धीरे धीरे पीछे हटने लगी पर सुनहरी बाबा को चेतावनी भी देती गई

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इस घटना के बाद तो सुनहरी बाबा की नींद ही उड़ गई और वे अपनी बँसखटिया उठाए घर चले गए. दूसरे दिन रात को सुनहरी बाबा ने बगीचे में न सोने के लिए बहाना बनाया और घर के बाहर दरवाजे पर ही सो गए. अरे यह क्या रात को उनकी अचानक नींद खुली सुनहरी बाबा फौरन जग गए और उस औरत से लगे पुछने की कौन हो तुम. वह औरत डरावनी हँसी हँसी और बोली कि रातवाली ही हूँ. तुम मुझसे पीछा नहीं छुड़ा सकते

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अब प्रतिदिन रात को वह डायन सुनहरी बाबा के पास आने लगी और सुनहरी बाबा चाहते हुए भी कुछ न कर सके. इस घटना को चलते 20-25 दिन बीत गए अब सुनहरी बाबा में पहले वाली ताकत नहीं रही वे बहुत ही कमजोर हो गए थे. उनके घरवाले ये समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर इनको क्या हो गया है. एक हट्टा कट्ठा आदमी इतना कमजोर कैसे हो गया. घरवालों ने सुनहरी बाबा से बहुत बार पूछा कि उन्हें क्या हो गया है पर वे लोक लाज के डर से कुछ नहीं बताते थे. कई डाक्टरों को दिखाया गया पर सुनहरी बाबा की हालत में कोई सुधार नजर नहीं आया.

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उस रात सुनहरी बाबा के साथ एक चमत्कार हुआ और वह चमत्कार यह था कि वह डायन उनके पास नहीं आई. सुबह सुनहरी बाबा जगे तो बहुत खुश थे. उनको लग रहा था वह डायनउनके पास नहीं आई. सुनहरी बाबा की नींद खुल गई और वे उठकर बैठ गए. वह कागज किसी अखबार का भाग था और उसमें हनुमान यंत्र बना हुआ था.

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अब सुनहरी बाबा समझ चुके थे कि हनुमानजी की वजह से उन्हें इस दुष्ट डायन से पीछा छूट गया था. दूसरे दिन नहा धोकर सुनहरी बाबा मंदिर गए और वहाँ से एक हनुमान का लाकेट खरीदकर गले में धारण किए और हनुमान चालीसा को सिर के पास रखकर ही सोते और अब आम के बगीचे में सोना भी शुरु कर दिए थे. हाँ पर वे जब भी अकेले सुनसान में उस बँसवाड़ी की तरफ जाते थे उस डायनको रोता हुआ ही पाते थे. वह डायन सुनहरी बाबा से अपने प्यार की भीख माँगते हुए गिड़ गिड़ाती रहती.

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