घंटे बजाता भूत, kids story in hindi

kids story in hindi 

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घंटे बजाता भूत बच्चो की कहानी 

kids story in hindi, यह बच्चो की कहानी, एक के बहुत ही पुराने गांव की है उस गांव में एक श्यामू नाम का लड़का रहता था श्यामू के साथ उसके माता-पिता भी रहते थे एक दिन श्यामू के गांव में एक एक गुड़िया बेचने वाला आया गुड़िया ले लो गुड़िया ले लो श्यामू ने उस गुड़िया वाले की आवाज सुनी और आवाज सुनकर श्यामू उसके पास गया



श्यामू ने देखा कि उसके पास गुड़ियों के साथ साथ कुछ घंटियां भी थी घंटियों को देख कर बड़ा खुश हुआ और सोचने लगा कि मुझे यह घंटी लेनी चाहिए फिर श्यामू ने एक घंटी खरीद ली फिर श्यामू उस घंटी को लेकर अपने घर वापस चला गया और गुड़िया बेचने वाला भी अब उस गांव से दूसरे गांव में अपनी गुड़िया बेचने के लिए वहां से चला गया



जब घंटी लेकर श्यामू अपने घर आया तो उसने अपनी मां को वह घंटी दिखाई और मां ने पूछा कि तुमने उन गुड़ियों में से सिर्फ यह घंटी ही चुनी श्याम ने कहा मुझे तो घंटी ही पसंद है इसलिए मैंने घंटी ही ले ली मुझे घंटी की आवाज बहुत अच्छी लगती है फिर श्यामू उस घंटे के साथ खेलने लगा और ऐसे ही समय बीतता चला गया श्यामू रोज ही उस घंटी को बजाता था और उस घंटी की आवाज सुनकर उसके माता-पिता बड़े परेशान हो रहे थे और कह रहे थे 

 

घंटे से ज्यादा देर मत खेलो बस थोड़ी सी देर खेल कर ही से रख दो श्यामू मान नहीं रहा था तो उसकी मां ने कहा कि अगर तुम ने घंटी नहीं रखी तो मैं यह घंटी किसी भूत को दे दूंगी पर श्यामू ने किसी की भी बात नहीं मानी और घंटी के साथ खेलता ही रहा फिर जब रात हो गई तो शाम को सो गया और अगले दिन सुबह जब श्यामू सो रहा था तो उसकी मां ने उसके पास से घंटी उठाई और घंटी को लेकर बाहर चले गए फिर जब श्यामू सुबह उठा तो उसने अपनी घंटी अपने पास नहीं पाई और श्यामू रोने लगा कि मेरे घंटी कहां चले गई

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तब उसकी मां वापिस आई और वो कहने लगी मैंने तुम्हें पहले ही कहा था कि अगर तुम बहुत ज्यादा देर तक इस से खेलोगे तो उसे भूत ले जाएगा अब भूतों उस जंगल में वापस ले गया है फिर श्यामू रोता रहता है पुरे दिन उसने ऐसा ही निकाल दिया फिर जब शाम हुई तो घंटी की आवाज उस जंगल में से आने लगी श्यामू को भी वह आवाज सुनाई दे रही थी और गांव वालों को भी सुनाई दे रही थी सभी लोगों से घंटी की आवाज़ सुनकर अपने अपने घर से बाहर निकल आए और श्यामू भी घर से बाहर आ गया उन लोगों को कहने लगा यह वही भूत बजा रहे हैं घंटी यह मेरी घंटी है जो बजा रहे हैं और कह कर वापस घर में चला गया

 

 ऐसा रोज होता रहा अब गांव वाले भी समझने लगे हैं कि शायद यह घंटी भूत ही बजा रहा है और हर शाम होते ही घंटियां बजने शुरू हो जाती थी रोज ऐसा ही हो रहा था सभी लोग अब घर से निकलते नहीं थे जब भी शाम होती थी सभी लोग अपने घरों में ही रहते थे उधर शामू के पिता ने भी सबको कहा की अब कोई भी शाम होते ही बाहर नहीं जाएगा भूतों का आतंक चारों तरफ फैल गया है और सभी लोग अपना खाना पीना खाकर सब लोग आराम करने लगे कोई भी घर से बाहर नहीं निकल रहा था

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तभी श्यामू के मन में आया कि यह तो मेरा घंटा है और कोई क्यों बजा रहा है मुझे अपना घंटा उस से लेकर ही आना चाहिए श्यामू को लगा कि वह मेरा घंटा है वह क्यों बजा सकता है जबकि वह मेरा है मुझे ही चाहिए और इस प्रकार उसने उस बात को ठान लिया कि मुझे उस भूत से वह घंटा वापस लाना ही है

फिर अगले दिन जब सुबह हुई तो श्यामू ने सोचा कि अब मुझे चलना चाहिए तभी मैं घंटा उससे लेकर आ सकता हूं तो  श्यामू ने जल्दी जल्दी खाना खाया और कुछ पैसे अपने पास से लिए और उस जंगल की तरफ चल दिया जहां से उस घंटे की आवाज आ रही थी जैसे ही श्यामू जंगल में गया तो उसके सामने एक शेर आ गया शेर को किस को देखकर शामू जल्दी-जल्दी पेड़ पर चढ़ गया और बैठ गया थोड़ी देर बाद शेयर भी वहां से वापस चला गया

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श्यामू अब पेड़ से नीचे उतर गया और जंगल की तरफ आगे बढ़ने लगा चलते-चलते श्यामू को प्यास लगी तो वह एक नदी के किनारे पर पहुंचा और वहीं पर एक पेड़ था जहां पर उसने अपना थैला रखा और पानी पीने लगा नदी का पानी बहुत ही मीठा था शाम को बहुत अच्छा लगा और कहा कि यह तो बहुत मीठा पानी है और उसने जी भर कर पानी पिया जैसे ही श्यामू पानी पीकर उठा

 

तो उसे घंटियां की फिर आवाजें आने लगी अब वह सोचने लगा कि आवाजे कहां से आ रही हैं फिर श्यामू की नजर एक पेड़ पर गई तो वहां पर बहुत सारी घंटियां टंगी हुई थी और वह हवा के कारण बज रही थी श्यामू ने सोचा कि इतनी सारी घंटियां यहां पर कौन लेकर आया है और यहां पर बांध लिया है शायद इसी में ही मेरी घंटी भी है जिसे मैं लेने सोचते सोचते शाम हो गई फिर कुछ देर बाद ही उस पेड़ के पास कुछ बंदर आ गए और

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उन बंदरों ने वह घंटियां पकड़ी और जोर-जोर से बजाने लगे अब श्यामू को समझ में आ गया था कि कोई भूत नहीं है यह घंटियां तो यह बंदर बजाते हैं और हम लोग सोच रहे थे कि भूत बजा रहे हैं फिर श्यामू ने अपना झोला जैसी बंदरों को दिखा कर फेंका तो सारे बंदरों थैला पर झपट गए और श्यामू जल्दी-जल्दी पेड़ पर चढ़कर सारी घंटियां उतार कर वहां से भाग निकला

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फिर थोड़ी ही देर बाद वहां पर गुड़िया बेचने वाला जा रहा था तो बंदरों ने उस पर हमला किया उसकी झोली छीन ली और सारे घंटियां जो की उसके पास थी वह सारी लेकर फिर से पेड़ पर चढ़कर बजाने लगे

 

kids story in hindi, बच्चो की कहानी, फिर श्यामू ने अपने घर पर आकर सारी बात बताई कि किस तरह बंदर घंटियां बजाते हैं और फिर उनके परिवार वालों ने सभी को बताया कि कोई भूत नहीं है यह तो बंदर घंटियां बजा रहे थे इस तरह श्यामू की सब समझदारी की ओर बुद्ध की तारीफ करने लगे और सब खुशी खुशी अपना जीवन व्यतीत करने लगे..

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