कौवे का पेड़, kahani for child

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कौवे का पेड़

kahani for child, bal kahani in hindi, एक पेड़ पर बहुत सारे कौवे में रहते थे वहीं पर उन्होंने अपनी जगह बना रखी थी और वह किसी को भी वहां पर आने नहीं देते थे वह बहुत ही शैतान होते हैं और वह किसी की भी बात नहीं सुनते हैं और अपनी मस्ती में रहते हैं




एक दिन आसमान में बहुत घटा छाई हुई थी और चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा हो गया था वह यह सब देख रहे थे और बरसात कभी भी आ सकती थी कुछ ही देर में वहां पर एक चिड़िया आ गई चिड़िया ने एक कौवे से कहा कि बरसात होने वाली है और हम भीग जाएंगे हो सकता है मौसम बहुत ज्यादा खराब हो




इसलिए मुझे थोड़ी देर के लिए यहां पर बैठने दो जिससे मैं आराम से इस बरसात से बच सकें कौवे ने कहा कि तुम यहां नहीं बैठ सकती यह हमारा पेड़ है और हम अपने पेड़ पर किसी को भी आने नहीं देते इस तरह चिड़िया बोली कि अगर बरसात हुई तो मैं कहां जाऊंगी और मैं अपने घर पर भी नहीं जा सकती

 

वह भी काफी दूर है और बरसात आने ही वाली है इस बात को सुनकर सारे कौवे यही कहने लगे कि तुम यहां से चले जाओ अगर तुम यहां से नहीं जाओगे तो हम तुम्हें यहां से मारकर भगा देंगे इसलिए इससे पहले कि हम तुम्हें मारे तुम यहां से अपने आप ही चली जाओ

 

 चिड़िया कहने लगी की एक ही रात की बात है अगर यहां पर मैं रुक जाती हूं तो मैं सुबह होते ही यहां से चले जाओगे लेकिन कौवे ने कहा कि तुम नहीं जा रही तो अब  तुम्हें यहां से भगाना ही पड़ेगा चिड़िया की तरह बहुत सारे कौवे  उसे मारने के लिए जैसे आई तो

 

चिड़िया वहां से चली गई चिड़िया जब जा रही थी तो थोड़ी ही दूरी पर एक पेड़ नजर आया और पेड़ पर चिड़िया बैठ गई और बरसात होने लगी और साथ ही साथ ओले भी पड़ने लगे और इतनी तेज ओले पड़ने लगे की बिल्कुल भी रुक नहीं ,बरसात बहुत जोरों पर थी चिड़िया को उस पेड़ पर एक ऐसी जगह मिल गई थी जहां पर चिड़िया छुपकर रह सकती थी और चिड़िया उस जगह छुप कर रह गई और पूरी रात बरसात होती रही

 

जब सुबह हुई तो चारों ओर उजाला ही उजाला था चिड़िया उस पेड़ पर जैसे ही उठी तो सारे कौवे नीचे पड़े हुए थे क्योंकि ओलों की मार से कौवे  भी उस पेड़ से नीचे गिर गए थे और कह रहे थे कि तुम कहां पर थी  जहां पर बरसात नहीं लगी

 

kahani for child, bal kahani in hindi, तब उसने कहा कि हमारी सब की रक्षा भगवान ही करते हैं अगर तुम मुझे सहारा दे देते तो मैं भी बच जाती लेकिन तुमने मुझे सहारा नहीं दिया इसलिए भगवान नहीं मुझे सहारा दिया है और भगवान के भरोसे ही मैं उस पेड़ पर रही जिससे कि मैं आज बच सकती हूं चिड़िया की बात सुनकर सारे कौवे में लज्जित हुए और अपने किए पर शर्मिंदा भी हुए.

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