महात्मा बुद्ध और भिखारी, hindi stories

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महात्मा बुद्ध और भिखारी की कहानी

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ये कहानी है महात्मा बुद्धा की, जिन्हे कोई भी कितना ही भला बुरा कहे लेकिन उन पर किसी की भी बात का कोई भी असर नहीं पड़ता था.क्या हुआ इस कहानी मैं अब हम आगे आपको बतायेगे. एक गाँव में महात्मा बुद्ध रहा करते थे . एक दिन महात्मा बुद्ध अपने एक अनुयायी के साथ सुबह की सैर कर रहे थे . अचानक ही एक भिखारी उनके निकट आया और उन्हें बुरा भला कहने लगा .





उसने महात्मा बुद्ध के लिए बहुत सारे गलत शब्द कहे लेकिन महात्मा बुद्ध फिर भी मुस्कुराते हुए चलते रहे . उस भिखारी ने देखा कि महात्मा बुद्ध पर कोई असर नहीं हुआ तो वह भिखारी और भी क्रोधित हो गया और उनके पूर्वजो तक को गालियाँ देने लगा . महात्मा बुद्ध फिर भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ते रहे और महात्मा बुद्ध पर कोई असर नहीं होते देख वो भिखारी निराश हो गया और उनके रास्ते से हट गया .




उस भिखारी के जाते ही महात्मा बुद्ध के अनुयायी ने उस महात्मा बुद्ध से पूछा कि अपने उस दुष्ट की बातों का कोई जवाब क्यों नहीं दिया वो बोलता रहा और आप मुस्कुराते रहे क्या आपको उसकी बातों से जरा भी कष्ट नहीं हुआ . महात्मा बुद्ध कुछ नहीं बोले और अपने अनुयायी को अपने पीछे आने का इशारा किया . कुछ देर चलने के बाद वो दोनों महात्मा बुद्ध के कक्ष तक पहुँच गये . उस से महात्मा बुद्ध बोले तुम यही रुको मैं अंदर से अभी आया .

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कुछ देर बाद महात्मा बुद्ध अपने कमरे से निकले तो उनके हाथों में कुछ मैले कपडे थे उन्होंने बाहर आकर उस अनुयायी से कहा, ये लो तुम अपने कपडे उतारकर ये कपडे धारण कर लों इस पर उस अनुयायी ने देखा कि उन कपड़ों में बड़ी तेज अजीब सी दुर्गन्ध आ रही थी इस पर उसने हाथ में लेते ही उन कपड़ों को दूर फेंक दिया . महात्मा बुद्ध बोले अब समझे जब कोई तुमसे बिना मतलब के बुरा भला कहता है तो तुम क्रोधित होकर उसके फेंके हुए गलत शब्द धारण करते हो अपने साफ़ सुथरे कपड़ो की जगह .

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इसलिए जिस तरह तुम अपने साफ सुथरे कपड़ों की जगह ये मैले कपडे धारण नहीं कर सकते उसी तरह मैं भी उस आदमी में फेंके हुए गलत शब्दों को कैसे धारण करता यही वजह थी कि मुझे उसकी बातों से कोई फर्क नहीं पड़ा . तभी तो दोस्तों कहा जाता है की अगर आपके शामे कोई भी बिना किसी बात के आपको गलत शब्द कह रहा है तो कहने दो और उसे बिना कुछ कहे ही आगे अपने रस्ते मैं बढ़ते चलो. आपके द्वारा कोई जवाब ना देने पर वो खुद ही शांत हो जायेगे और अपने रस्ते चले जायेगा.

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