चांदी का जूता, hindi best story

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चांदी का जूता हिंदी कहानी

hindi best story, hindi story, story in hindi, old story in hindi, एक नगर में सुमित नाम का एक आदमी रहता था एक दिन वह अपने दोस्त अमित के यहां उससे मिलने गया अमित के बेटे की शादी हो गई थी सुमित को यह बात पता नहीं थी वह तो अपने मित्र दोस्त से मिलने वैसे ही गया था.




उसके घर पहुंचकर उसे पता चला कि उसके बेटे की शादी भी हो गई है अमित और सुमित बचपन के पक्के मित्र थे उन दोनों ने कॉलेज भी एक साथ किया था और शादी के बाद दोनों अलग-अलग रहने लग गए थे जब सुमित अमित के घर पहुंचा तो उसका घर देखकर वह चौंक गया क्योंकि कॉलेज में तो अमित बहुत ही आलसी था.




वह खुद अपना सामान इधर-उधर नहीं रखता था उसने देखा कि उसके घर की बैठक कैसी है मानव किसी फिल्म का सेट लगाया गया हो दीवार पर मैं यह महंगी पेंटिंग टंगी है इतने में ही अमित की बीवी आई उसने सुमित को नमस्ते किया वह बहुत ही सुंदर थी और ऊपर से नीचे तक गहने पहन रखे थे सुमित ने उसको नमस्ते,

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 वह बोली भाई साहब आज हमारी याद कैसे आ गई सुमित ने कहा आपने तो मुझे इसकी शादी का कार्ड भी नहीं दिया अमित की पत्नी रमा ने कहा नहीं ऐसा नहीं हो सकता हमने तो आपको कार्ड पोस्ट ही  किया था पर आप ही नहीं आए

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 अमित की पत्नी बहुत तेज थी सुमित ने  कोई बात नहीं मेरी ही गलती है इतने में अमित आया और मुझे गले लगा कर मुझसे नमस्ते की और अपनी पत्नी से कहने लगा चलो ना नाश्ते की तैयारी करो मैं और नाश्ता करने बैठे मैंने देखा कि एक बहुत ही सुंदर टेबल पर चाय और नाश्ता लगा रही है मेरे दोस्त अमित ने इशारा करते हुए कहा यह मेरे बेटे सुरेश की पत्नी सीता है m.a. फर्स्ट क्लास पास किया है और पीएचडी कर रही है

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 इतने में ही अमित की पत्नी ने कहा इसने पढ़ाई में मेडल भी जीता है और सीता से कहा कि तुम दिखाओ सीता को यह दिखावा पसंद नहीं था वह नहीं गई और अमित की पत्नी खुद जाकर वह मेडल लेकर मेरे पास आई और दिखाते हुए बोली यह देखो सोने का है और अपनी बहू सीता की तारीफ़ करने लगी कहने लगी सारा काम खुद करती है

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हमें कुछ नहीं करने देती और एक कॉलेज में पढ़ाने भी जाती है मैंने कहा था कि बहुत से इतना काम कर आना ठीक नहीं जब यह नौकरी करती है तो आप एक नौकर रख लो,  पर मेरे दोस्त की पत्नी रमा ने कहा भाई साहब घर का ही तो काम है 4 ही तो जने हैं कितना काम होता है वैसे भी नौकरों का क्या भरोसा और मुझे किसी के हाथ का काम पसंद भी नहीं आता

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इतने में मेरे दोस्त अमित ने अपनी पत्नी की बात काटते हुए कहा कि यह सब तो बहाने हैं तुमने ही नौकर को भगा दिया की अब तो करने वाली आ गई है भड़क गई और बोली हां मैं ही दिखती हूं तुम्हें मैं ही सारा काम करूं अब बुढ़ापे में ही मैं ही करूं बहू के आने के बाद भी मैं रसोई में काम करती अच्छी लगूंगी

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क्या मैंने कहा भाभी जी इसमें हर्ज ही क्या है जब बेचारी बहु कमा कर लाती है तो उसमें से एक नौकर रख लेगी तो क्या बुरा होगा अभी ही मेरे दोस्त के लड़के की शादी हुई बहू 12वीं पास है और दहेज में बहुत सारा पैसा लाई घर में नौकर चाकर हैं लेकिन कुछ भी नहीं करती अगर उससे कुछ काम करने के लिए बोलो तो कहती है मेरे पिताजी ने जो पैसे दिए हैं

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उनसे नौकर लगा लो मेरा दोस्त मुझे अंदर ले गया और कहने लगा चलो अब यह सब तो चलता ही रहेगा बैठकर बातें करते हैं  सिगरेट जलाई और मुझसे कहा मैं सिगरेट नहीं पीता वह बोला कि जब हम कॉलेज में पढ़ते थे तो मैंने कसम खाई थी कि मैं दहेज नहीं लूंगा और ना ही दूंगा पर अब जब मेरे बेटे की शादी हुई तो उसके बहुत सारे रिश्ते आए

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जब से मेरी पत्नी ने दहेज की मांग की सब आए और चाय नाश्ता करके चले गए किसी ने नहीं कि सिर्फ सीता का रिश्ता आया सीता मेरी पत्नी को पसंद आ गई उस कार्ड छप गए कार्ड छपने के 15 दिन बाद मेरी पत्नी रमा ने मुझसे कहा कि सीता के पिता से दहेज की बात कर लो मैं उसके पिता के पास गया मैंने बस इतना कहा कि हम चाहते हैं कि हमें पढ़ी लिखी बहू मिले और साथ में कुछ पैसे भी दे देना

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सीता के पिता ने मुझसे कुछ और नहीं कहा उन्होंने सीता की शादी में एक बहुत बड़ा चांदी का बर्तन दिया उस बर्तन को जब हमने खोल कर देखा तो वह पैसों से भरा था उसे देख कर मेरी पत्नी खुश हो गई और उसमें से पैसे निकालकर बिछाने लगी वह सारे पैसे न आए थे और कुल मिलाकर 7000 थे

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hindi best story, hindi story, story in hindi, old story in hindi, पैसों के नीचे एक चांदी का जूता भी था जो सीता के बाप ने मेरे मुंह पर नहीं मेरे दिल पर मारा था क्योंकि मैंने सीधे से उनसे दहेज ही मांगा था जो लेना और देना दोनों ही बहुत बड़ा पाप है.

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