दिल की बात, dil ki baat

dil ki baat

दिल की बात

dil ki baat, हमे “दिल की बात” जरूर सुन्नी चाहिए कुछ हद तक हमारा दिल सही होता है और साथ ही हमारा दिमाक भी उसी तरह से जब  बरसात आते ही लोगो के मन खुसी से झूम जाते है.




हमारा दिल खुसी से भर जाता है है, शायद ही कोई इस खुसी से वाकिफ न हो , पर कुछ लोगो को ऐसा महसूस नहीं होता है, क्योकि की उन्हें ये सब पसंद नहीं है. ऐसा क्यों है , क्यों उन्हें ये सब पसंद नहीं है,




इसमे से ज्यादातर लोग बिजली के कड़कने से बेचैन हो जाते है, या कहे की एड दर उनके अंदर घर कर जाता है, अगर देखा जाये तो पुरषो की अपेक्षा महिला मैं क्रिया  ज्यादा देखने को मिलती है, इसका कारण बरसात के मौसम मैं धुप का न मिलना है, उसके कारण मन का उदास होना, काम मैं मन न लगना आदि समस्या है,

 

जिस प्रकार महिला मुसीबत आने पर घबरा जाती है उसी दूसरी और महिला गवर्नमेंट सर्विस मैं हर मुसीबत का मुकाबला कर रही है, उसी प्रकार मौसम के साथ होता है,

 

किसी पर इसका प्रबाव अच्छा और किसी पर बुरा पड़ता है,देखा जाये तो ऐसा मन के ऊपर निर्भर करता है,

 

जब आस्मां मैं बदल छाये रहते है और रौशनी काम हो जाती है तो इसका असर पूरी तरह से हमारे दिमाक पर पड़ता है नतीजा हमारा मूड ख़राब व् मन उदास हो जाता है, उदासी और बेचैनी हमे डिप्रेशन मैं डाल देती है, 

आपको भी अगर ऐसा महसूस होता है तो आप भीगने से बचने की बजाए भीगना जरुरी है, तभी आप इससे भर आ पायंगे, 

 

मौसम के समय पकोड़े और भुट्टा खाये आपको और बेहतर महसूस होगा,  और साथ ही म्यूजिक सुने, किताबे पढ़े , मूवी देखे, 

 

dil ki baat, इस काम को करने से आपको अच्छा फील होगा है और आप खुद को बेहतर महसूस कर पायंगे.

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